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बलरामपुर डीईओ कार्यालय में जांच, प्रारंभिक पड़ताल में वित्तीय गड़बड़ी के संकेत

डीईओ कार्यालय में वित्तीय अनियमितता की जांच तेज, भंडार गृह का सत्यापन टला; प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी के संकेत

बलरामपुर। जिले के रामानुजगंज स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है। मंगलवार को अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता जांच के लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और कार्यालय के रिकॉर्ड एवं भंडार गृह के सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की। हालांकि, संबंधित कर्मचारी के अवकाश पर होने के कारण भंडार गृह का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका, जिससे जांच अधूरी रह गई।

अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता ने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। इसी क्रम में वे स्वयं रामानुजगंज स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रारंभिक जांच की।

भंडार गृह का होना था भौतिक सत्यापन

जांच के दौरान अधिकारियों की टीम को कार्यालय के भंडार गृह का भौतिक सत्यापन करना था। इस प्रक्रिया के तहत रिकॉर्ड में दर्ज सामग्री और भंडार गृह में उपलब्ध सामान का मिलान किया जाना था। लेकिन संबंधित कर्मचारी के छुट्टी पर होने के कारण भंडार गृह नहीं खुल सका और सत्यापन की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी।

अपर कलेक्टर ने बताया कि इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि भंडार गृह का प्रभारी कर्मचारी अवकाश पर है, इसलिए सत्यापन नहीं कराया जा सका।

अनुपस्थित कर्मचारी का प्रभार क्यों नहीं सौंपा गया?

अपर कलेक्टर प्रमोद गुप्ता ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी सरकारी कार्यालय में यदि कोई कर्मचारी अवकाश पर जाता है तो उसके कार्यों का प्रभार नियमानुसार किसी अन्य कर्मचारी को सौंपा जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भंडार गृह के प्रभारी कर्मचारी की अनुपस्थिति के बावजूद किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को प्रभार क्यों नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल शिकायत की पुष्टि करना नहीं, बल्कि कार्यालय में उपलब्ध सामग्री, वित्तीय रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। यदि भंडार गृह का सत्यापन नहीं हो पाएगा तो जांच प्रभावित होगी।

प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितता के संकेत

अपर कलेक्टर ने बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पूरे मामले की विस्तृत जांच, दस्तावेजों के परीक्षण और भंडार गृह के सत्यापन के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कार्यालय के वित्तीय अभिलेख, खरीद संबंधी दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।

सत्यापन के बाद ही सामने आएगी पूरी तस्वीर

भंडार गृह का सत्यापन नहीं हो पाने के कारण जांच फिलहाल अधूरी है। प्रशासन अब संबंधित कर्मचारी की उपस्थिति में भौतिक सत्यापन कराने की तैयारी कर रहा है। सत्यापन पूरा होने के बाद रिकॉर्ड और वास्तविक सामग्री का मिलान किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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