किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं धान खरीदी का समय नहीं बढ़ा तो कांग्रेस करेगी उग्र आंदोलन

किसानों और मजदूरों के हित में कांग्रेस ने सरकार से पुनर्विचार की मांग,धान खरीदी का समय नहीं बढ़ा तो होगा उग्र आंदोलन
बलरामपुर। कांग्रेस पार्टी ने किसानों, मजदूरों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार पर सीधा हमला बोला है। कांग्रेस ने दो टूक कहा है कि सरकार की लापरवाही और किसान विरोधी नीतियों के कारण आज अन्नदाता आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से गुजर रहा है। यदि किसानों के हित में धान खरीदी की समय-सीमा तत्काल नहीं बढ़ाई गई, तो कांग्रेस उग्र आंदोलन छेड़ने से पीछे नहीं हटेगी।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि 31 जनवरी 2026 तक घोषित धान खरीदी की अवधि के बावजूद हजारों किसानों के टोकन अब तक नहीं कटे हैं। सरकार की अव्यवस्थित व्यवस्था के कारण किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब किसान अपनी उपज बेच ही नहीं पा रहा, तो समय-सीमा तय करने का क्या औचित्य है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूरे छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के नाम पर किसानों को गुमराह किया गया। कहीं टोकन में देरी, कहीं तकनीकी बहाने, तो कहीं अंतिम चरण में दो दिन का टोकन एक ही दिन में काटकर किसानों को परेशान किया गया। कई किसानों की धान आज भी घरों में पड़ी है, जबकि सरकार आंकड़ों में खरीदी पूरी दिखाने में लगी है।
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने किसानों का रकबा काटकर और बड़े किसानों से जबरन समर्पण कराकर उन्हें भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। कांग्रेस का कहना है कि यह सीधा-सीधा किसानों के साथ धोखा है।
मनरेगा के नाम में किए गए परिवर्तन को लेकर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा और कहा कि यह गरीब मजदूरों की पहचान और अधिकारों पर हमला है। पार्टी ने मांग की कि मनरेगा को पूर्ववत स्वरूप में लागू रखा जाए।

जनवरी माह में बलरामपुर जिले सहित कई क्षेत्रों में PDS दुकानों में चावल नहीं होने को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। कांग्रेस का कहना है कि केवल अंगूठा लगवाकर बाद में चावल देने का आश्वासन देना आम जनता के साथ खुला मजाक है।
कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल धान खरीदी का समय नहीं बढ़ाया और किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो कांग्रेस किसान हित में सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के नाम में केंद्र सरकार द्वारा किए गए परिवर्तन पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि कानून का नाम और उसकी मूल व्यवस्था को पूर्ववत रखा जाए, ताकि ग्रामीण मजदूरों के अधिकार सुरक्षित रह सकें।

जनवरी माह में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत बलरामपुर जिले के लगभग सभी ब्लॉकों में चावल की दुकानों में चावल उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी कांग्रेस ने उठाया। आरोप है कि दुकानदार केवल उपभोक्ताओं से अंगूठा लगवाकर अगले माह चावल देने की बात कह रहे हैं, जिससे आम जनता असमंजस में है और राशन मिलने को लेकर संशय बना हुआ है। पार्टी ने इस व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के दौरान किसानों को तकनीकी समस्याओं, टोकन कटने में देरी और अव्यवस्थित प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। कई किसान अब तक अपनी धान नहीं बेच पाए हैं, जबकि अंतिम चरण में कुछ किसानों के दो दिन के टोकन एक ही दिन में काट दिए गए, जिससे किसानों को भारी परेशानी उठानी पड़ी।
इसके अलावा कांग्रेस का आरोप है कि धान खरीदी के दौरान सरकार द्वारा किसानों का रकबा काटा गया और कई बड़े किसानों से समर्पण कराया गया, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है।

कांग्रेस पार्टी ने सरकार से मांग की है कि किसानों और मजदूरों के हित में इन सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने धान खरीदी की समय-सीमा नहीं बढ़ाई, तो कांग्रेस किसानों के हित में सड़क से सदन तक आंदोलन तेज करेगी।




