
आरक्षक की शहादत पर गरमाया मामला: खरवार समाज ने दी चेतावनी, मांगी सीबीआई जांच और शहीद का दर्जा

बलरामपुर, छत्तीसगढ़:
सनवाल थाना अंतर्गत लिब्रा गांव में रेत माफिया द्वारा ड्यूटी पर तैनात आरक्षक को ट्रैक्टर से कुचलकर मारने की घटना ने पूरे जिले में आक्रोश की लहर फैला दी है। अब यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। खरवार समाज के नेतृत्व में गांव के लोगों ने बलरामपुर कलेक्टर राजेंद्र कटारा को ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
कुछ दिन पहले बलरामपुर जिले के लिब्रा गांव में झारखंड से आए रेत माफिया अवैध रेत खनन कर रहे थे। जब आरक्षक ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो माफियाओं ने उसे ट्रैक्टर से कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। यह घटना उस समय की है जब आरक्षक अपनी ड्यूटी पर था। यह न सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता दर्शाता है, बल्कि रेत माफिया के बढ़ते दुस्साहस का भी प्रमाण है।

हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
इस जघन्य हत्या पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। इसके बाद पुलिस विभाग हरकत में आया और झारखंड में लगातार छापेमारी कर नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। हालांकि, पीड़ित परिवार और समाज का मानना है कि कई मुख्य आरोपी अभी भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।
खरवार समाज की प्रमुख मांगें
खरवार समाज के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें प्रमुख रूप से की गई हैं:
1. मृतक आरक्षक को शहीद का दर्जा दिया जाए।
2. परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।
3. परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी प्रदान की जाए।
4. इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराई जाए।
5. रेत माफिया और उनके संरक्षण देने वाले प्रभावशाली लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई हो।
आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि यदि इन मांगों पर सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती है, तो समाज को उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आंदोलन सिर्फ जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
आरोप: रेत माफियाओं को रसूखदारों का संरक्षण
खरवार समाज और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया वर्षों से क्षेत्र में अवैध खनन कर रहे हैं और उन्हें कुछ प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि यह माफिया इतना मजबूत और हिंसक हो गया है कि अब वह कानून के रखवालों की जान तक लेने से नहीं हिचकता।
क्या कहती है जनता और समाज?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि अब भी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया और दोषियों को सजा नहीं मिली, तो भविष्य में और बड़ी घटनाएं हो सकती हैं। समाज में भय और असुरक्षा का माहौल है।
अब नज़रें सरकार पर
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि छत्तीसगढ़ सरकार इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाती है। क्या मृतक आरक्षक को शहीद का दर्जा मिलेगा? क्या परिवार को न्याय मिलेगा? और सबसे महत्वपूर्ण – क्या रेत माफिया पर लगाम लगेगी?


