
बलरामपुर, छत्तीसगढ़।
वाड्रफनगर पुलिस द्वारा आदतन अपराधी मयंक यादव और युवराज गोस्वामी को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को कांग्रेस नेताओं का प्रतिनिधिमंडल एसडीओपी कार्यालय पहुंचा और चौकी प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस का आरोप है कि वाड्रफनगर चौकी प्रभारी धीरेन्द्र तिवारी ने मयंक और युवराज के साथ मारपीट की और फर्जी केस दर्ज किया। कांग्रेसियों ने दो दिन के भीतर चौकी प्रभारी पर केस दर्ज न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्या है पूरा मामला?
18 मई की रात स्थानीय निवासी राघवेंद्र प्रताप सिंह की कॉन्फ्रेंस कॉल चौकी प्रभारी के मोबाइल पर आई, जिसमें वह डरा-सहमा नजर आया। जानकारी के बाद उसे पुलिस ने पंचवटी ढाबा के पास से थाने लाया, जहां उसने शिकायत दी कि मयंक यादव और युवराज गोस्वामी ने उसके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। डर के चलते वह छिप गया था।
राघवेंद्र की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ़्तार कर सीआरपीसी की धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।
मयंक यादव पर दर्ज पुराने केस:
मयंक यादव के खिलाफ 2015 से अब तक गंभीर धाराओं में 9 अपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें एससी/एसटी एक्ट, मारपीट, हत्या के प्रयास और शासकीय कार्य में बाधा जैसे आरोप शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उस पर कई बार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई हो चुकी है और उसे जिला बदर भी किया जा चुका है।
कांग्रेस का पक्ष:
कांग्रेस नेता सुषमा यादव (ब्लॉक अध्यक्ष) और हरिहर यादव (जिला उपाध्यक्ष) के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चौकी प्रभारी ने बिना उचित जांच के कार्रवाई की। उनका कहना है कि आवेदन में किसी का नाम नहीं था, फिर भी आरोपियों को गलत तरीके से फंसाया गया।
पुलिस प्रशासन की स्थिति:
एसपी वैभव बैंकर और एएसपी विश्वदीपक त्रिपाठी के नेतृत्व में बलरामपुर जिले में अपराधियों पर लगातार शिकंजा कसा जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मयंक और युवराज के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की गई है।




