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बलरामपुर में बेखौफ रेत माफिया: करकली की गुलफुला नदी में खुलेआम अवैध उत्खनन, आरक्षक की मौत के बाद भी प्रशासन मौन

एसडीएम करुण डहरिया से संपर्क की कोशिश नाकाम, निर्देशों की उड़ रही धज्जियां

बलरामपुर, छत्तीसगढ़: जिले में अवैध रेत उत्खनन की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। कुसमी तहसील के करकली गांव स्थित गुलफुला  नदी में खुलेआम पोकलेन और भारी वाहनों की मदद से रेत माफिया बेधड़क खनन कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब उस क्षेत्र में हो रहा है, जो जिले के तेजतर्रार माने जाने वाले एसडीएम करुण डहरिया के अधीन आता है।


हाल ही में अवैध उत्खनन को रोकने गए एक पुलिस आरक्षक की मौके पर दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने सख्ती के आदेश जारी किए थे। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि माफियाओं के हौसले पहले से भी ज्यादा बुलंद हैं। उत्खनन का काम दिन-रात जारी है, और भारी वाहनों के ज़रिए रेत का परिवहन विभिन्न हिस्सों में किया जा रहा है।

               एसडीएम से संपर्क नहीं

खबर लिखे जाने तक जब इस मुद्दे पर एसडीएम करुण डहरिया से प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार फोन किया गया, तो उनका फोन "नॉट रीचेबल" आ रहा था। दो से तीन बार कॉल करने के बावजूद भी एसडीएम का फोन नहीं उठा, और उनसे कोई बातचीत संभव नहीं हो पाई। प्रशासन की चुप्पी और गैर-जवाबदेही ने लोगों के बीच गहरी नाराज़गी और अविश्वास पैदा कर दिया है।



प्रशासनिक आदेशों की उड़ रही धज्जियां
आरक्षक की मौत के बाद जिले के वरिष्ठ अधिकारियों ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। परंतु आज भी उसी स्थान पर माफिया खुलेआम खनन कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक आदेश केवल कागजों में सीमित रह गए हैं।



जनता में आक्रोश, प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एक  पुलिसकर्मी की जान भी इस व्यवस्था को नहीं जगा पा रही, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की उम्मीद करना व्यर्थ है। लोगों का यह भी आरोप है कि माफियाओं और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण यह पूरा रैकेट सालों से फल-फूल रहा है।

बलरामपुर जिले में अवैध रेत उत्खनन की स्थिति अब एक गंभीर कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बन चुकी है। यदि तत्काल सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आने वाले समय में और भी गंभीर परिणाम ला सकता है।

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