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लुती  बांध त्रासदी: 7 मौतों के बाद भी चुप सरकार, खैरवार समाज करेगा आर्थिक नाकाबंदी

लुती  बांध हादसा: खैरवार समाज ने सरकार पर लगाया लापरवाही और अन्याय का आरोप, कल होगा चक्काजाम

लुती बांध हादसा: मुआवजे और कार्रवाई की मांग पूरी न होने पर खैरवार समाज उग्र, कल से चक्काजाम

सरकार पर लापरवाही का आरोप, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने तक आंदोलन जारी रहेगा

बलरामपुर।
लुती जलाशय (ग्राम धनेशपुर) के टूटने से हुए हादसे ने छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले को झकझोर दिया है। इस हादसे में खैरवार समाज (अनुसूचित जनजाति) के एक ही परिवार की दो गर्भवती महिलाओं सहित छह लोगों की मौत हो गई, जबकि दूसरे परिवार से एक सदस्य की मौत हुई। कुल मिलाकर सात लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, दो लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। कई लोग घायल हैं, तीन घर पूरी तरह बह गए हैं, मवेशियों की मौत और फसलों की तबाही ने हालात और भयावह बना दिए हैं।

सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप

खैरवार/खेरवार/खरवार आदिवासी विकास परिषद ने सरकार और प्रशासन पर सीधा हमला बोला है। परिषद का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अब तक मृतक परिवारों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया है। इसके साथ ही, बांध टूटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

परिषद ने इसे मृतक परिवारों के साथ घोर अन्याय करार देते हुए कहा है कि खैरवार समाज इस तरह की नाइंसाफी कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।

कल से चक्काजाम की घोषणा

समाज ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि 7 सितंबर 2025, रविवार सुबह 11 बजे से तातापानी मुख मार्ग (एनएच-343) पर चक्काजाम और आर्थिक नाकाबंदी की जाएगी। परिषद ने साफ किया है कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

नेताओं का बयान

परिषद के प्रदेश अध्यक्ष बीर सिंह, जिला अध्यक्ष उदय राज सिंह, युवा प्रभाग के प्रदेश अध्यक्ष अमित कुमार सिंह, जिला कार्यकारिणी अध्यक्ष रवि प्रकाश सिंह और जिला युवा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने कहा—

“सरकार की चुप्पी और प्रशासन की लापरवाही ने मृतकों के परिवार को और पीड़ा दी है। जब तक मुआवजा और न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। अगर हमारी आवाज अनसुनी की गई तो आंदोलन और उग्र होगा।”

हादसे की पृष्ठभूमि

लुती जलाशय का निर्माण ग्रामीणों के जीवन और खेती को संवारने के लिए किया गया था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी खामियों के चलते यह बांध टूट गया। हादसे में सबसे ज्यादा नुकसान खैरवार जनजाति के परिवारों को उठाना पड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बांध की समय पर देखरेख और मरम्मत की जाती, तो यह भीषण त्रासदी टल सकती थी।

परिषद का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने मृतक परिवारों को उचित मुआवजा नहीं दिया है और दोषी अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। परिषद ने इसे मृतक परिवारों के साथ घोर अन्याय बताते हुए चेतावनी दी है कि खैरवार समाज ऐसे अन्याय को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगा।

हादसे में दो गर्भवती महिलाओं सहित सात लोगों की मौत, दो के लापता होने, कई घायल, मवेशियों की मौत, तीन घरों और फसलों के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद प्रशासन की खामोशी ने प्रभावित परिवारों की पीड़ा और गुस्से को और बढ़ा दिया है।

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