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माँ गायत्री विद्या मंदिर एवं जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल का भव्य वार्षिकोत्सव समारोह

माँ गायत्री विद्या मंदिर एवं जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल का भव्य वार्षिकोत्सव समारोह

रामानुजगंज में स्थित माँ गायत्री विद्या मंदिर एवं जीवन ज्योति पब्लिक स्कूल (इंग्लिश मीडियम) का वार्षिकोत्सव समारोह बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में नगर के कई गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया और विद्यालय द्वारा शिक्षा, संस्कार एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार की सराहना की।


    विद्यालय की स्थापना और उद्देश्य

माँ गायत्री विद्या मंदिर की स्थापना सन् 1993 में की गई थी। इस विद्यालय की नींव इस उद्देश्य से रखी गई थी कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों की सीख दी जाए। स्थापना के बाद से ही यह विद्यालय अपने उद्देश्यों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। यहाँ से शिक्षा प्राप्त कर कई छात्र शिक्षक, अधिकारी एवं समाज के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त कर चुके हैं।



विद्यालय प्रबंधन का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि बच्चों को न केवल पुस्तकीय ज्ञान मिले, बल्कि वे अपने संस्कारों और मूल्यों के प्रति भी जागरूक रहें। यही कारण है कि यह विद्यालय नगर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक बन चुका है।


मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथियों की उपस्थिति

इस भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नवनिर्वाचित नगरपालिका अध्यक्ष  रमन अग्रवाल उपस्थित रहे। उनके साथ ही शासकीय लरंग साय स्नातक महाविद्यालय, रामानुजगंज की प्राचार्या रोस लिली बड़ा, सेवानिवृत्त शिक्षक महेंद्र प्रसाद, शिक्षक विपिन पाठक एवं नगर पंचायत के अजय गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ा रहे थे।



मुख्य अतिथि रमन अग्रवाल ने विद्यालय के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि –
“माँ गायत्री विद्या मंदिर केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि एक संस्कार केंद्र है, जहाँ बच्चों को शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और संस्कारों की सीख दी जाती है। इस विद्यालय से निकले हुए कई विद्यार्थी आज समाज में उच्च पदों पर आसीन हैं, जो इस संस्थान की गुणवत्ता को दर्शाता है।”

उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों को शिक्षित करने में लगे हुए हैं। साथ ही उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे विद्यालय के साथ समन्वय बनाकर अपने बच्चों को एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करें।



शिक्षा और संस्कारों का केंद्र: माँ गायत्री विद्या मंदिर

विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक शासकीय शिक्षकों की अपेक्षा कम वेतन पर अपनी सेवाएँ देते हैं, फिर भी वे अपने कार्य को पूरी लगन और निष्ठा के साथ करते हैं। यही कारण है कि विद्यालय का स्तर लगातार ऊँचा उठता जा रहा है।

प्राचार्या रोस लिली बड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि –
“विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चे ही हमारे देश के भविष्य हैं। हमें इनका सही मार्गदर्शन करना चाहिए ताकि वे उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हो सकें। विद्यालय जिस प्रकार से शिक्षा और संस्कारों का समन्वय कर बच्चों को तैयार कर रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है।”

उन्होंने कोविड-19 के दौरान मोबाइल के बढ़ते उपयोग और उसके प्रभाव पर भी चिंता व्यक्त की और अभिभावकों से आग्रह किया कि –
“बच्चों को मोबाइल की लत से बचाने का प्रयास करें और उन्हें पुस्तकों, खेलकूद और रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित करें।”

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियाँ



विद्यालय के विद्यार्थियों ने नृत्य, नाटक, कविता वाचन और गीत जैसी प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें भारतीय संस्कृति और समाज की झलक देखने को मिली।

सेवानिवृत्त शिक्षक महेंद्र प्रसाद, शिक्षक विपिन पाठक और नगर पंचायत के अजय गुप्ता ने भी विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।

समापन एवं भविष्य की दिशा

समारोह के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने सभी अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया और इस परंपरा को आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया।

माँ गायत्री विद्या मंदिर न केवल शिक्षा का केंद्र है, बल्कि संस्कार, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को विकसित करने वाला एक सशक्त संस्थान भी है। सन् 1993 में स्थापित यह विद्यालय आज शिक्षा और संस्कारों के क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है। इस वार्षिकोत्सव ने यह साबित कर दिया कि विद्यालय आने वाली पीढ़ियों को न केवल शिक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें सशक्त और जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

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