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“बलरामपुर में माफिया राज: पुलिसकर्मी की हत्या, कलेक्टर-खनिज विभाग नदारद!”

बलरामपुर में माफियाओं का राज? पुलिसकर्मी की हत्या के बाद भी कलेक्टर-खनिज विभाग चुप! जनता पूछ रही है—अब भी नहीं जागोगे क्या?

बलरामपुर, छत्तीसगढ़: सोमवार तड़के लिब्रा गांव में रेत माफियाओं ने कानून की सरेआम हत्या कर दी। अवैध रेत उत्खनन रोकने गए आरक्षक शिव बच्चन सिंह को ट्रैक्टर से कुचलकर मार डाला गया। लेकिन इस दर्दनाक और शर्मनाक घटना के बाद भी जिला प्रशासन, कलेक्टर और खनिज विभाग की चुप्पी सबके गले नहीं उतर रही।

सब कुछ जानते थे फिर भी चुप क्यों थे अफसर?

स्थानीय ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि रेत खनन की सूचना पहले ही तहसीलदार और खनिज विभाग को दी जा चुकी थी। यानी सिस्टम को सब पता था—कहाँ से रेत उठ रही है, किसे भेजी जा रही है, कौन लोग लगे हैं। फिर कलेक्टर ने क्या कार्रवाई की? खनिज विभाग क्यों सोता रहा?

क्या प्रशासन माफियाओं की ढाल बन चुका है?

जब दो दिन पहले तीन ट्रैक्टर पकड़े गए, तब भी कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया। और अब जब एक पुलिसकर्मी की जान चली गई, तब भी कोई अफसर मौके पर नहीं पहुँचा। क्या इस चुप्पी का मतलब मिलीभगत है? या माफियाओं से डर कर अफसर कुर्सियों में दुबके बैठे हैं?

मंत्री का क्षेत्र, लेकिन माफियाओं का शासन!

यह इलाका छत्तीसगढ़ सरकार के कृषि मंत्री और बलरामपुर विधायक रामविचार नेताम का क्षेत्र है। एक मंत्री के क्षेत्र में पुलिसकर्मी तक सुरक्षित नहीं—तो फिर आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद किससे की जाए?

प्रशासन ने पुलिस को अकेला छोड़ दिया था

सवाल ये भी है कि पुलिस अकेले क्यों गई? खनिज विभाग का अमला साथ क्यों नहीं था? क्या यह सोच-समझकर बनाई गई चूक थी? आखिर कितनी और जाने जाएंगी, तब जाकर अफसर कुर्सियों से उठेंगे?

अब जनता पूछ रही है:
– क्या बलरामपुर में माफिया प्रशासन से ज़्यादा ताकतवर हो गए हैं?
– खनिज विभाग क्यों सिर्फ कागज़ों में कार्रवाई करता है?
– कलेक्टर ने अब तक दोषी अफसरों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?


एक ईमानदार आरक्षक की मौत के बाद भी सिस्टम में कोई हरकत नहीं। अब ये सिर्फ माफियाओं का नहीं, प्रशासन की नाकामी का केस है। सवाल सिर्फ रेत का नहीं, सवाल पूरे शासन के रवैए का है। क्या इस हत्या को भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?

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