छत्तीसगढ़जसपुरझारखण्डदिल्लीप्रदर्शनबलरामपुरबिलासपुरभारतमनेन्द्रगढ़राजपुरराज्यसभारामचंद्रपुररामानुजगंजरायगढ़रायपुरशिक्षा

युक्तियुक्तकरण या शिक्षा संकट? कांग्रेस बोली – यह षड्यंत्र है, सुधार नहीं**

छत्तीसगढ़ में 10463 स्कूलों की बंदी पर बवाल, कांग्रेस ने बताया शिक्षा और रोजगार विरोधी कदम

रायपुर, 6 जून 2025 |

बलरामपुर जिले के कांग्रेस भवन “युक्तियुक्तकरण” कारण  को लेकर प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष बताया की छत्तीसगढ़ में 10463 स्कूलों को बंद करने और लगभग 45,000 शिक्षकों के पदों को समाप्त करने के सरकार के निर्णय ने राज्य की सियासत में नया बवाल खड़ा कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस फैसले को शिक्षा और रोजगार विरोधी बताते हुए इसे आदिवासी और दूरस्थ अंचलों के बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय करार दिया है। कांग्रेस का दावा है कि यह निर्णय प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को ध्वस्त करने की दिशा में उठाया गया एक सोचा-समझा षड्यंत्र है।

“युक्तियुक्तकरण” या पद समाप्ति की चाल?

प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव और जिला कांग्रेस अध्यक्ष केपी सिंह देव ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा है कि साय सरकार “युक्तियुक्तकरण” के नाम पर स्कूलों को बंद कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि स्कूलों को जबरिया मर्ज कर दिया गया है और उनके DISE कोड तक विलोपित कर दिए गए हैं।

बयान में कहा गया है कि रमन सरकार के कार्यकाल में भी प्रदेश में 3300 से अधिक स्कूल बंद किए गए थे और 12000 से अधिक शिक्षकों के पद समाप्त कर दिए गए थे। अब साय सरकार उसी राह पर चलते हुए 10463 स्कूलों को बंद करने जा रही है, जिससे 45000 से अधिक शिक्षकों के पद खत्म हो जाएंगे।

शिक्षक-छात्र अनुपात में बड़ा बदलाव

कांग्रेस का दावा है कि इस फैसले के बाद सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात में भारी असंतुलन आ जाएगा। फिलहाल प्राथमिक विद्यालयों में यह अनुपात 1:21 है, जिसे बढ़ाकर 1:30 किया जा रहा है। इसी तरह मिडिल स्कूलों में यह अनुपात 1:26 से बढ़ाकर 1:35 कर दिया जाएगा।
इसके चलते शिक्षकों के एक तिहाई से अधिक पद समाप्त हो जाएंगे।

भाजपा एक तरफ जहां स्कूल और शिक्षकों को हटा रही है तो दूसरी ओर शराब दुकान खोल रही है "छत्तीसगढ़ में शिक्षा नहीं शराब मिलेगा"
              _ डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव

प्राथमिक कक्षाओं की बात करें तो कक्षा 1 और 2 में तीन विषय होते हैं, जबकि कक्षा 3 से 5 तक चार विषय। कुल मिलाकर तीन शिक्षकों को 18 पीरियड लेने होते हैं, लेकिन अब यह कार्य केवल दो शिक्षकों पर थोप दिया गया है। यही नहीं, मिडिल स्कूल में केवल एक एचएम और एक शिक्षक को 18 पीरियड के साथ 60 बच्चों की जिम्मेदारी दी जा रही है।


मध्यान्ह भोजन, गैर-शैक्षणिक कार्य और शिक्षक पर बोझ

बयान में यह भी कहा गया है कि शिक्षकों पर न केवल पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, बल्कि मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था, डाक, प्रशासनिक आदेशों का पालन और गैर-शैक्षणिक कार्य भी उन्हीं पर लाद दिए गए हैं।
इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।

रोज़गार पर संकट, रसोईया और सहायकों का भविष्य अंधकारमय

स्कूलों के मर्जर और बंदी का प्रभाव केवल शिक्षकों तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूलों में कार्यरत रसोईया, चौकीदार, भृत्य, और स्व-सहायता समूह की महिलाएं जो मध्यान्ह भोजन बनाती थीं, वे भी प्रभावित होंगी। कांग्रेस का कहना है कि हजारों परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

भर्ती के वादे पर उठे सवाल

कांग्रेस ने सरकार को उसके चुनावी वादों की याद दिलाई। सरकार ने विधानसभा में दावा किया था कि प्रदेश में 58000 शिक्षकों के पद रिक्त हैं, और 35000 पद भरे जाएंगे। 2025 के बजट में भी 20000 शिक्षकों की भर्ती का उल्लेख किया गया था।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अब पद ही समाप्त कर दे रही है ताकि उसे नई भर्तियां न करनी पड़े।
“जब पद ही नहीं रहेंगे तो भर्ती किस पर होगी?” – यही सवाल कांग्रेस अब पूरे प्रदेश में उठा रही है।

प्रभावित क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सबसे अधिक नुकसान बस्तर, सरगुजा, और जशपुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों को होगा, जहां पहले ही स्कूल और शिक्षक दोनों की भारी कमी है।
सरकारी दावा है कि स्कूलों को बंद नहीं किया जा रहा है बल्कि उन्हें मर्ज किया गया है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि वास्तविकता इससे उलट है।

सहमति के बिना लिया गया निर्णय

बयान में कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि इतना बड़ा निर्णय बिना किसी जनभागीदारी और विचार-विमर्श के लिया गया। न तो शिक्षक संगठनों से सलाह ली गई, न पालक संघों से बात की गई, और न ही छात्रों, शिक्षा विशेषज्ञों या प्रशासनिक विशेषज्ञों की राय ली गई।

आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस ने ऐलान किया है कि वह इस फैसले के खिलाफ जमीनी लड़ाई लड़ेगी।
प्रदेश के सभी जिलों और ब्लॉकों में आंदोलन चलाया जाएगा और शीघ्र ही इसकी तिथि और स्वरूप की घोषणा की जाएगी।

“जब-जब शिक्षक का विरोध हुआ है, सत्ता परिवर्तन हुआ है।”
डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव ने यह कहकर चेतावनी दी कि जनता इस फैसले का करारा जवाब देगी।

राज्य में शिक्षा नीति को लेकर बड़ा टकराव उभरता दिख रहा है। जहां सरकार “युक्तियुक्तकरण” को व्यवस्थात्मक सुधार बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनविरोधी और असंवेदनशील कदम बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अहम मोड़ ला सकता है।


कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं — डॉ. जे.पी. श्रीवास्तव (उपाध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस), केपी सिंह देव (जिला अध्यक्ष), अशोक सिंह, सागर सिंह, कृपा शंकर सिंह, और नन्हे लाल सहित अनेक कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Related Articles

Back to top button