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“देश का बजट नहीं, सिर्फ अमीर घराने का बजट “गरीब और मजदूर वर्ग की उपेक्षा” – सुनील सिंह”

सुनील सिंह, जिला कांग्रेस कमेटी बलरामपुर रामानुजगंज के प्रवक्ता, ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर तीखा हमला किया है। उन्होंने इसे “अमीर घराने का बजट” करार देते हुए कहा कि यह बजट आम जनता, गरीबों, किसानों और आदिवासियों की जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। उन्होंने इसे एक “जुमला बजट” और “सत्ता बचाने वाला बजट” बताते हुए अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है।

सुनील सिंह के मुख्य बिंदु:

1. आम आदमी के लिए कोई राहत नहीं:

बजट को “लॉलीपॉप बजट” बताया गया, जिसमें गरीब और मध्यम वर्ग को विशेष राहत देने की कोई ठोस योजना नहीं है।

महंगाई, बेरोजगारी और मनरेगा जैसी योजनाओं पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

गरीबों की समस्याओं और उनकी आवाज़ को बजट में पूरी तरह से अनदेखा किया गया।


2. किसानों और आदिवासियों की अनदेखी:

किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का जिक्र तक नहीं है।

आदिवासी विकास के बजट में कटौती की गई है, जिससे उनके विकास को प्राथमिकता देने का दावा खोखला साबित होता है।

छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।


3. अमीरों के पक्ष में बजट:

सुनील सिंह का दावा है कि यह बजट अंबानी और अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के हित में तैयार किया गया है।

बजट में जो घोषणाएं की गईं, वे केवल बड़ी कंपनियों और निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित हैं।


4. महंगाई और बेरोजगारी पर चुप्पी:

बढ़ती महंगाई पर बजट में कोई समाधान नहीं दिया गया।

खाने के तेल जैसी आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता महंगाई से परेशान है।

बेरोजगारी पर कोई ठोस नीति या योजना पेश नहीं की गई।


5. बिहार और अन्य राज्यों को लेकर चुनावी घोषणाएं:

बिहार के लिए की गई घोषणाओं को चुनावी लाभ लेने का प्रयास बताया।

बिहार मखाना बोर्ड की स्थापना।

मिथिलांचल में नहर परियोजना।

नया ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी की स्थापना।


पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों को पूरी तरह अनदेखा करने का आरोप लगाया।


6. टैक्स प्रणाली और मिडिल क्लास पर सवाल:

मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत देने की बात की गई है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ कितना होगा, यह भविष्य में ही स्पष्ट होगा।

जीएसटी में सुधार की जरूरत को नजरअंदाज किया गया।

टैक्स टेररिज्म से राहत की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।


7. बजट को “सपने दिखाने वाला” बताया:

सुनील सिंह का कहना है कि बजट में लाखों-करोड़ों योजनाओं का सपना दिखाया गया है, लेकिन हकीकत में 40% राशि भी योजनाओं पर खर्च नहीं होती।

इसे “कागजों पर तैयार किया गया खाका” करार दिया गया।


8. कुल मिलाकर चुनावी बजट:

उन्होंने कहा कि यह बजट पूरी तरह से आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।



1. गरीबों और मजदूर वर्ग की अनदेखी

सरकार की 5 किलो राशन योजना को केवल प्रचार का हिस्सा बताया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे गरीबी और भुखमरी का समाधान हो सकता है?

मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना पर बजट में चर्चा न होने को लेकर उन्होंने गहरी चिंता जताई। उन्होंने इसे मजदूरों के अधिकारों की अनदेखी करार दिया।

गरीबों के कल्याण की योजनाओं पर आवंटित राशि का 40% भी खर्च न होने का दावा करते हुए इसे योजनाओं के क्रियान्वयन में असफलता का उदाहरण बताया।


2. किसानों के लिए निराशाजनक बजट

किसानों की सबसे बड़ी मांग, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ठोस नीति, पूरी तरह नजरअंदाज की गई।

कृषि क्षेत्र में नए निवेश या तकनीकी सुधारों के लिए कोई उल्लेखनीय योजना नहीं पेश की गई।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किसी भी विशेष योजना का जिक्र न होने पर उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाया।

3. आदिवासियों और पिछड़े क्षेत्रों की अनदेखी

छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य के लिए बजट में कोई विशेष प्रावधान न होना आदिवासी विकास की अनदेखी दर्शाता है।

आदिवासी योजनाओं की बजट राशि में कटौती को लेकर उन्होंने गहरा आक्रोश जताया और इसे आदिवासी हितों की अवहेलना बताया।

4. मिडिल क्लास के लिए झूठी राहत

टैक्स छूट की घोषणाओं को “लॉलीपॉप” कहा और सवाल उठाया कि इससे मिडिल क्लास की रोजमर्रा की समस्याएं जैसे महंगाई और बेरोजगारी पर क्या असर पड़ेगा।

जीएसटी में सुधार की जरूरत को अनदेखा किया गया, जिससे व्यापारियों और छोटे उद्योगपतियों को राहत मिल सके।

5. महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार की चुप्पी

उन्होंने तेल, गैस, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को जनता के लिए गंभीर संकट बताया।

बेरोजगारी के मुद्दे पर बजट में ठोस योजना का न होना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।

युवा वर्ग के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने के बजाय केवल निजी निवेशकों को बढ़ावा दिया गया।

6. अमीरों का पक्षधर बजट

उन्होंने कहा कि बजट का मकसद केवल बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाना है।

अंबानी और अडानी जैसे उद्योगपतियों के लिए तैयार योजनाओं को जनता के पैसे का दुरुपयोग बताया।

यह बजट केवल अमीरों को और अमीर बनाने की प्रक्रिया को तेज करेगा।

7. चुनावी राजनीति का हिस्सा

बिहार में मखाना बोर्ड, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, और नहर परियोजनाओं जैसी घोषणाओं को आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया कदम बताया।

पंजाब, हरियाणा, हिमाचल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का जिक्र न होने पर उन्होंने इसे क्षेत्रीय भेदभाव का प्रतीक कहा।

8. बजट को “जुमला बजट” कहा

बजट को “जुमलेबाजी” करार देते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल कागजों पर तैयार किया गया एक सपना है, जो जमीन पर कभी हकीकत नहीं बनता।

योजनाओं की घोषणा तो होती है, लेकिन उनका क्रियान्वयन अधूरा और असफल रहता है।


उन्होंने इसे सत्ता बचाने का प्रयास बताते हुए कहा कि यह आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अमीरों को फायदा पहुंचाने वाला बजट है।

सुनील सिंह का बयान सरकार की आर्थिक नीतियों और बजट के प्रति गहरी असहमति को दर्शाता है। उन्होंने इसे गरीबों, किसानों, आदिवासियों और मध्यम वर्ग के लिए हानिकारक बताया और इसे बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला बजट करार दिया। उनके अनुसार, बजट में किए गए वादे केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं और आम जनता के लिए इनमें कोई ठोस लाभ नहीं है।

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