छत्तीसगढ़ के पांच आदिवासी जिलों में आश्रम-छात्रावासों की खरीदी और निर्माण कार्यों में अनियमितता की जांच के आदेश

छत्तीसगढ़ सरकार के आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग ने प्रदेश के पांच आदिवासी बहुल जिलों — सरगुजा, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर — में संचालित छात्रावासों और आश्रमों में सामग्री की खरीदी और निर्माण कार्यों में संभावित अनियमितताओं को लेकर जांच के आदेश जारी किए हैं।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
विभाग के मंत्री रामविचार नेताम ने बीते दिनों विभिन्न माध्यमों से सामने आई शिकायतों को गंभीरता से लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह आरोप सामने आए थे कि छात्रावासों और आश्रमों में जरूरी सामग्री की खरीददारी में पारदर्शिता नहीं बरती गई, और निर्माण/मरम्मत कार्यों में गुणवत्ता से समझौता किया गया।
इन आरोपों की पृष्ठभूमि में मंत्री नेताम ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्काल जांच शुरू करने के निर्देश दिए।
एडिशनल डायरेक्टर का पत्र, तीन दिन में मांगा गया रिपोर्ट
इन निर्देशों के तहत आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के एडिशनल डायरेक्टर ने संबंधित पांचों जिलों के कलेक्टरों को पत्र जारी कर तीन दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है। यह पत्र 18 जुलाई 2025 को मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी किया गया।
पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि:
"छात्रावास / आश्रमों में सामग्री क्रय तथा मरम्मत एवं निर्माण कार्य में अनियमितता संबंधी शिकायत मीडिया में प्रकाशित हुई है, जिस पर शासन द्वारा जांच प्रतिवेदन चाहा गया है। अतः तीन दिवस के भीतर शिकायत के संबंध में जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।"
किन बिंदुओं पर होनी है जांच?
जांच का फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर रहेगा:
आश्रमों/छात्रावासों में खरीदी गई सामग्री की मात्रा, गुणवत्ता और क्रय प्रक्रिया की वैधता
मरम्मत एवं निर्माण कार्यों में खर्च की गई राशि की पारदर्शिता
कामों में शामिल ठेकेदारों और एजेंसियों की जांच
लाभार्थियों (छात्रों) से मिली शिकायतों की पड़ताल
पिछले वर्षों में हुए कार्यों के दस्तावेज़ों और बिलों की समीक्षा
जांच के संभावित प्रभाव
इस आदेश से स्पष्ट है कि शासन अब विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अधिक सतर्क हो गया है। खासकर ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां आदिवासी बच्चों की शिक्षा, रहन-सहन और विकास से जुड़े संसाधनों का उपयोग होता है, वहां अनियमितताओं को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस जांच का सीधा असर उन अधिकारियों और ठेकेदारों पर पड़ सकता है जो यदि दोषी पाए गए, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना बन सकती है। साथ ही, भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सिस्टम में सुधार और ऑडिट प्रक्रिया को सख्त करने की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं।
नजर प्रशासन पर
अब सबकी निगाहें संबंधित जिला प्रशासन पर हैं कि वे जांच को कितनी गंभीरता से लेते हैं और समय-सीमा में कितनी सटीक रिपोर्ट शासन को सौंपते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस पहल से छात्रावासों और आश्रमों की दशा और दिशा दोनों में सुधार होगा।



