
अवैध धान कारोबार का संगठित नेटवर्क उजागर
दो आरोपी जेल में, पर असली सवाल अब भी बाकी
रकबा हेरफेर, फर्जी दस्तावेज और अंतरराज्यीय धान तस्करी में राजस्व तंत्र की भूमिका संदिग्ध
बलरामपुर-रामानुजगंज।
थाना सनावल क्षेत्र में सामने आया अवैध धान परिवहन और कालाबाजारी का मामला अब केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि यह पूरा खेल बिना एक सुनियोजित प्रशासनिक सहयोग के संभव नहीं था। अब इस प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

पिकअप पकड़ाने से खुली पूरी परत
26 दिसंबर 2025 की शाम राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा पकड़ा गया एक पिकअप वाहन इस पूरे नेटवर्क की पहली कड़ी साबित हुआ। चालक के बयान के आधार पर जब कुर्लुडीह निवासी श्याम सुन्दर गुप्ता के घर दबिश दी गई, तो वहां से जो सामग्री बरामद हुई, उसने साफ कर दिया कि यह कोई तात्कालिक या छोटा मामला नहीं है, बल्कि महीनों से चल रही एक सुव्यवस्थित अवैध गतिविधि है।

बरामदगी ने खोली सिस्टमेटिक धोखाधड़ी की पोल
घर से बरामद करीब 400 बोरी अवैध धान, लाखों रुपये नकद और सैकड़ों बैंक पासबुक, खरीदी केंद्र व किसानों से जुड़े दस्तावेज इस ओर इशारा करते हैं कि आरोपियों के पास न केवल किसानों की निजी जानकारी थी, बल्कि बैंकिंग और खरीदी प्रक्रिया तक उनकी सीधी पहुंच थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना संबंधित बैंक शाखाओं, खरीदी केंद्रों और राजस्व रिकॉर्ड के समन्वय के इतनी बड़ी संख्या में किसान किताब,केसीसी पासबुक,चेकबुक,भरे हुए विड्रॉल फार्म एक ही स्थान पर मिलना अत्यंत गंभीर विषय है।
कानूनी दृष्टि से कौन-कौन से अपराध बनते हैं

पुलिस ने फिलहाल आरोपियों के विरुद्ध धारा 3, 7 आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 एवं 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया है।
लेकिन कानूनी जानकारों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने पर इनमें और भी गंभीर धाराएं जुड़ सकती हैं, जैसे:
बीएनएस की धोखाधड़ी व आपराधिक षड्यंत्र से जुड़ी धाराएं,लोक सेवकों की संलिप्तता पाए जाने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,फर्जी दस्तावेज तैयार करने व उपयोग करने से संबंधित धाराएं
अंतरराज्यीय तस्करी के तहत संगठित अपराध की श्रेणी
यदि यह सिद्ध होता है कि राजस्व या बैंक से जुड़े किसी कर्मचारी या अधिकारी ने जानबूझकर सहयोग किया, तो मामला सीधे विशेष न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में जा सकता है।रकबा हेरफेर बिना उच्चस्तरीय समीक्षा असंभव
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू किसानों के रकबे में किया गया कथित हेरफेर है।
सूत्रों का कहना है कि जिन किसानों के नाम पर हजारों बोरी धान की खरीदी दिखाई गई, उनके वास्तविक रकबे उस उत्पादन के अनुरूप नहीं थे।

प्रशासनिक जानकारों के अनुसार,
इतने बड़े पैमाने पर रकबे का हेरफेर बिना राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी, मौन सहमति या शालिप्ता संभव नहीं माना जा सकता।
पटवारी स्तर पर की गई किसी भी प्रविष्टि का अनुमोदन ऊपर तक जाता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि
किस स्तर पर सत्यापन विफल हुआ,
किन अधिकारियों ने आंख मूंदकर रिपोर्ट को मंजूरी दी,
और किन कारणों से पहले धान खरीदी में ऐसा लिखना होने के कारण 9 महीने तक किसी भी हल्के का प्रभार ना देकर हल्के से हटाए गए थे पटवारी को फिर से कई हल्कों का प्रभार सौंपा गया। वह भी फिर से धान खरीदी के समय


अचानक धान समर्पण भी संदेह के घेरे में
रामचंद्र पुर के सनावल क्षेत्र के कई गांवों में हाल के एक दो दिनों में जिस तेजी से धान समर्पण रामानुजगंज़ के पटवारी के द्वारा कराया गया, वह भी जांच के दायरे में आ गया है।
ग्राम कुंडपन में एक दिन में 3000 बोरी और ग्राम टाटीआथर में दो दिन में 4068 बोरी धान का समर्पण करवाया गया है सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा रहा।
आरोप है कि पहले जिन पटवारियों द्वारा यह कार्य समय पर नहीं कराया गया, उसे जिला प्रशासन के द्वारा दूसरे हल्के के पटवारी के द्वारा करवाया गया है।

क्या जांच बिचौलियों से आगे बढ़ेगी?
अब सबसे अहम सवाल यह है कि क्या पुलिस जांच केवल दो आरोपियों तक सीमित रहेगी?
या फिर राजस्व विभाग, बैंकिंग तंत्र और खरीदी केंद्रों से जुड़े उन चेहरों तक पहुंचेगी, जिनके बिना यह पूरा नेटवर्क खड़ा नहीं हो सकता था?
सूत्र बताते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं।
फिलहाल दोनों आरोपी न्यायिक रिमांड पर हैं और पुलिस के पास दस्तावेजों का विशाल भंडार है। अब यह देखना होगा कि कानून का शिकंजा केवल बिचौलियों पर कसता है या फिर सिस्टम के भीतर बैठे जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचता है।
इस मामले का अंतिम सच क्या है, यह तो आने वाला समय और निष्पक्ष जांच ही बताएगी।




