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नेताम की खरी-खरी के बाद गरमाई सियासत, सोशल मीडिया पर भाजपा-कांग्रेस में घमासान

मंत्री नेताम की पोस्ट पर सोशल मीडिया में संग्राम, भाजपा-कांग्रेस नेताओं में जमकर वाद-विवाद

कांग्रेस ने पोस्ट को बनाया मुद्दा, भाजपा नेताओं ने भी दिए जवाब; आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया सियासी माहौल

बलरामपुर जिले के रामानुजगंज विधानसभा के विधायक एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम की भाजपा के कुछ तथाकथित नेताओं को लेकर की गई सोशल मीडिया पोस्ट अब राजनीतिक विवाद का रूप लेती जा रही है। पोस्ट सामने आने के बाद क्षेत्र के भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर जमकर वाद-विवाद देखने को मिल रहा है।

मंत्री नेताम ने अपनी पोस्ट में पार्टी पदाधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा था कि भाजपा के पद केवल विभागों में बिल पास करवाने, सिफारिशें कराने और फोटो खिंचवाने के लिए नहीं होते। संगठन जब आलोचनाओं के बीच खड़ा हो और विचारधारा पर प्रहार हो रहे हों, तब संगठन के पक्ष में भी बोलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पद का सम्मान केवल लेटरपैड और नामपट्टिका से नहीं बढ़ता, बल्कि कठिन समय में संगठन के साथ खड़े होने से बढ़ता है।

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मंत्री की इस पोस्ट को क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं ने सोशल मीडिया पर वायरल करना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेताओं ने पोस्ट को आधार बनाकर भाजपा के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों की सक्रियता पर सवाल उठाए। इसके बाद भाजपा नेताओं और समर्थकों ने भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेताओं के आरोपों का जवाब देना शुरू कर दिया।

 

पोस्ट को लेकर आमने-सामने आए दोनों दल

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच पोस्ट, कमेंट और प्रतिक्रियाओं के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। कांग्रेस नेता जहां मंत्री की पोस्ट को भाजपा संगठन की अंदरूनी स्थिति का प्रमाण बताते हुए भाजपा पर निशाना साध रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक इसे संगठन को मजबूत करने और पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाने वाली सामान्य नसीहत बता रहे हैं।विवाद के बीच भाजपा के मंडल अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष, मीडिया प्रभारी, कार्यालय मंत्री, सोशल मीडिया प्रभारी, प्रवक्ता, आईटी सेल तथा विभिन्न प्रकोष्ठों की भूमिका भी सोशल मीडिया चर्चा का हिस्सा बन गई है।

नाम नहीं, लेकिन निशाने पर कौन?

मंत्री नेताम ने अपनी पोस्ट में किसी नेता या पदाधिकारी का नाम नहीं लिया है। इसके बावजूद पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आखिर उनकी नाराजगी किन नेताओं की कार्यशैली को लेकर है। कांग्रेस इसी अस्पष्टता को लेकर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा समर्थक पोस्ट को संगठनात्मक अनुशासन और सक्रियता से जोड़कर देख रहे हैं।

कुल मिलाकर, एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ यह मामला अब भाजपा और कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया वार में बदल गया है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं आने के कारण क्षेत्र का राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है।

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