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गरीब आदिवासी किसान बने ठगी का शिकार, बैंक–समिति कर्मचारियों पर मिलीभगत के आरोप

सहकारी बैंक रामानुजगंज से लाखों का फर्जी आहरण,गोंड़ समाज के गरीब किसान बने शिकार, पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार

रामानुजगंज।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित शाखा रामानुजगंज से किसानों के नाम पर करोड़ों की योजना के अंतर्गत लाखों रुपये का फर्जी ऋण स्वीकृत कर आहरित कर लिया गया। इस धोखाधड़ी का शिकार हुए गोंड़ समाज के गरीब व अशिक्षित किसान अब न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। पीड़ित किसानों ने पुलिस अधीक्षक बलरामपुर  वैंकर वैभव रमणलाल को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और फर्जी आहरित राशि की वसूली की मांग की है।




बिचौलिए और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का आरोप

जानकारी के अनुसार, आ.जा. सेवा सहकारी समिति मर्यादित महावीरगंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत भाला के गोंड़ समाज के दर्जनों किसानों के नाम से बिचौलियों ने किसानों की जानकारी के बिना ही केसीसी ऋण स्वीकृत करवाकर रकम आहरित कर ली। किसानों का कहना है कि यह फर्जीवाड़ा समिति और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ है।

किनके नाम से हुआ फर्जी आहरण?

पीड़ित किसानों ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे ज्ञापन में ऋण स्वीकृति और आहरण का पूरा ब्यौरा दिया।

1. हरिचरण आत्मज लालमन (गोंड़)

खाता क्रमांक : 104004677707

11/05/2023 को ₹1,60,000 ऋण स्वीकृत

15/05/2023 को आहरण दर्ज

2. रूपलाल आत्मज जगन (गोंड़)

खाता क्रमांक : 104004657351

11/05/2023 को ₹1,60,000 स्वीकृत व आहरित

30/09/2023 को ₹1,60,000 स्वीकृत

23/11/2023 को आहरण

कुल राशि : ₹3,20,000

3. बजरंग आत्मज रामलाल (गोंड़)

खाता क्रमांक : 104004677366

11/05/2023 को ₹1,60,000 स्वीकृत

12/05/2023 को आहरित

4. मानसाय आत्मज लखपत (गोंड़)

खाता क्रमांक : 104002282473

11/05/2023 को ₹1,60,000 स्वीकृत

12/05/2023 को आहरण


5. देवकल आयाम आत्मज रामसूरत आयाम (गोंड़)

खाता क्रमांक : 104004542362

15/11/2022 को ₹1,20,000 स्वीकृत व आहरित


सभी पीड़ित ग्राम पंचायत भाला के निवासी हैं और सभी गोंड़ समाज से ताल्लुक रखते हैं।

              योजनाबद्ध साजिश का संकेत

फर्जीवाड़े के तौर-तरीके को देखकर साफ जाहिर होता है कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश है।

अधिकांश किसानों के खाते में एक ही दिन ऋण स्वीकृति और उसी दिन/अगले दिन आहरण दर्ज किया गया।

किसानों की जानकारी के बिना ही उनके नाम पर लाखों की राशि उठाई गई।

यह पूरा मामला समिति और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं है।


    विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किया गया आहरण

किसानों के नाम से फर्जी आहरण छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले हुआ। ग्रामीणों को संदेह है कि इसमें ऐसे लोग शामिल थे जिन्हें राजनीतिक हालात की पूरी जानकारी थी।

आरोप है कि यह सोचकर ऋण आहरित किया गया कि चुनाव के बाद किसी पार्टी द्वारा ऋण माफी योजना लागू की जाएगी।

यदि ऋण माफी हो जाती तो किसानों को कभी पता भी नहीं चलता और दोषियों का पूरा लाभ हो जाता।

           कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?

2018 में कांग्रेस सरकार ने ऋण माफी की घोषणा कर किसानों को राहत दी थी।

इसी आधार पर 2023 में भी ऋण माफी की उम्मीद में फर्जी आहरण किया गया।

लेकिन जब ऋण माफी योजना लागू नहीं हुई और समिति ने किसानों को बकाया वसूली का नोटिस भेजा, तब किसानों को वास्तविकता का पता चला।

आधार कार्ड से बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर किसानों ने देखा कि उनके खाते में लाखों की ऐसी लेनदेन दर्ज है, जो उन्होंने कभी ली ही नहीं।

        भूमि रकबे में भी हेरफेर की आशंका

नियम के अनुसार, केसीसी ऋण प्रति एकड़ भूमि के हिसाब से स्वीकृत किया जाता है। लेकिन ग्राम पंचायत भाला के किसानों ने कहा कि उनके पास उतनी भूमि ही नहीं है, जितना ऋण स्वीकृत दिखाया गया है। इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि किसानों की भूमि संबंधी रिकॉर्ड में भी हेरफेर किया गया है।

📌 जांच में उठ रहा नया सवाल पूर्व में भी सहकारी बैंक में फर्जी लोन प्रकरण की जांच हो चुकी है। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि उस जांच के दौरान संबंधित कृषक और उनके नाम पर दर्ज फर्जी ऋण कैसे बच गए? यह भी जांच का अहम विषय है।


नियम तोड़कर किया गया आहरण

हकारी समिति से ऋण प्रक्रिया के लिए किसान के तीन खाते अनिवार्य होते हैं –

डीएमआर कैश खाता

डीएमआर काइंड खाता

बचत खाता


नियम के तहत, ऋण राशि पहले डीएमआर खाते में जमा होती है और फिर बचत खाते में ट्रांसफर होकर आहरित की जाती है। लेकिन इस फर्जीवाड़े में सीधे डीएमआर खाते से ही आहरण कर लिया गया, जो प्रक्रिया की गंभीर अनियमितता है।

जांच और कार्रवाई की मांग

अब बड़ा सवाल यह है कि किसानों का निजी डाटा आखिर बिचौलियों तक पहुँचा कैसे?

क्या समिति के कर्मचारियों ने जानकारी बाहर पहुंचाई?

या फिर बैंक के स्तर पर डाटा का दुरुपयोग हुआ?


इन्हीं सवालों को लेकर पीड़ित किसानों ने पुलिस अधीक्षक व कलेक्टर बलरामपुर को ज्ञापन सौंपा है और दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

आगे क्या होगा?

यह मामला गरीब व अशिक्षित आदिवासी किसानों के साथ हुए बड़े वित्तीय अपराध का है।
यदि जांच निष्पक्ष होती है तो समिति और बैंक कर्मचारियों की भूमिका उजागर हो सकती है।

वहीं, किसानों को उनकी ईमानदारी से अर्जित जमीन और जीवन से जुड़े अधिकार वापस दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।


अब देखना दिलचस्प होगा कि इस पूरे मामले में जिला प्रशासन और पुलिस आगे क्या कदम उठाते हैं।

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