कन्या आश्रम पशुपतिपुर की प्रधान पाठक निलंबित, बच्चों की उपेक्षा और अभद्र व्यवहार के आरोप प्रमाणित

प्रधान पाठक सुमित्रा सिंह निलंबित — कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार, बच्चों की उपेक्षा और नियम उल्लंघन के आरोप साबित
रामानुजगंज, 4 नवम्बर 2025।
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलरामपुर-रामानुजगंज (छत्तीसगढ़) ने शासकीय प्राथमिक शाला कन्या आश्रम पशुपतिपुर की प्रधान पाठक श्रीमती सुमित्रा सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई कलेक्टर (आदिवासी विकास) बलरामपुर-रामानुजगंज से प्राप्त शिकायत और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।
शिकायत और जांच की पृष्ठभूमि
कलेक्टर (आदिवासी विकास) कार्यालय से प्राप्त प्रस्ताव पत्र क्रमांक /2060/स्था./आदि.वि./2025-26, दिनांक 24 सितम्बर 2025 के अनुसार, श्रीमती सुमित्रा सिंह के विरुद्ध कई गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
इन शिकायतों में आश्रम में कार्यरत कर्मचारियों के साथ अशोभनीय एवं अभद्र व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न, तथा शासन द्वारा निर्धारित खाद्य सामग्री बच्चों को पर्याप्त रूप से उपलब्ध न कराना जैसे आरोप शामिल थे।
जांच समिति द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। रिपोर्ट में कहा गया कि श्रीमती सिंह का व्यवहार संस्था के वातावरण को प्रभावित कर रहा था और इससे आश्रम के बच्चों की देखभाल एवं पोषण व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
शासन के निर्देशों की अवहेलना
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद श्रीमती सिंह अधीक्षक आवास में अपने पति के साथ निवास कर रही थीं, जबकि नियमों के अनुसार आश्रम अधीक्षक आवास में किसी भी अन्य व्यक्ति को ठहरने की अनुमति नहीं होती।

साथ ही, जब 24 सितम्बर 2025 को उन्हें अधीक्षिका के प्रभार से भारमुक्त किया गया, तब भी उन्होंने आश्रम के भंडार कक्ष का ताला अपने पास रख लिया, जिससे आश्रम के बच्चों के लिए भोजन और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हुई।
नोटिस लेने से किया इंकार
कार्यालयीन पत्र क्रमांक 12740 दिनांक 31 अक्टूबर 2025 के माध्यम से श्रीमती सुमित्रा सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। लेकिन जांच में पाया गया कि उन्होंने नोटिस लेने से इंकार किया। इसे प्रशासन ने गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि उनके कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है।
निलंबन एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई
उपरोक्त तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने आदेश जारी करते हुए कहा कि श्रीमती सिंह का कृत्य “शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय और अस्वीकार्य” है।
इस पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम-9(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन का आदेश पारित किया गया है।
साथ ही, उनके विरुद्ध नियम-14 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने की अनुशंसा की गई है।
निलंबन अवधि की शर्तें
निलंबन की अवधि में श्रीमती सुमित्रा सिंह का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, रामचंद्रपुर कार्यालय निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें मूला नियम-53 के अंतर्गत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
आदेश की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को भेजी गई
इस आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज, सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास), विकासखंड शिक्षा अधिकारी वाड्रफनगर एवं रामचंद्रपुर सहित संबंधित अधिकारियों को सूचना एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है।
“स्कूल आ पढ़े घर, जिनगी ला गढ़े बर, बढ़ते कदम शिक्षा की ओर” — जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलरामपुर-रामानुजगंज



