छात्रा से गलत इशारा व आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर प्राचार्य को एक वर्ष की सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना

छात्रा से गलत इशारा व आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर प्राचार्य को एक वर्ष की सजा, 50 हजार रुपये जुर्माना
कॉलेज छात्रा से अशोभनीय व्यवहार का मामला: प्राचार्य दोषी, जिला न्यायालय ने सुनाई एक वर्ष की सजा
जिले की माननीय जिला न्यायालय ने कॉलेज की छात्रा के साथ अशोभनीय टिप्पणी और गलत इशारा करने के गंभीर मामले में आरोपी प्राचार्य को दोषी ठहराते हुए कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह निर्णय छात्राओं की सुरक्षा और शैक्षणिक परिसरों में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक अहम संदेश माना जा रहा है।
मामले के अनुसार, घटना 12 अगस्त 2024 की है। पीड़िता एक कॉलेज की छात्रा है। वह अपने एक सहपाठी और एक सहेली के साथ कॉलेज से संबंधित कार्य के सिलसिले में आरोपी प्राचार्य से मिलने उनके कक्ष में गई थी। इसी दौरान आरोपी प्राचार्य ने छात्रा की ओर गलत इशारा किया और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि “घर पर आना, तब तुम्हारा काम करेंगे।” इस व्यवहार से छात्रा मानसिक रूप से आहत हो गई।
घटना के बाद पीड़िता ने साहस दिखाते हुए आरोपी प्राचार्य के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75/3 एवं धारा 79 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की। जांच पूर्ण होने के पश्चात मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण की सुनवाई माननीय जिला न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पीड़िता के बयान, साथ मौजूद सहपाठी और सहेली के कथन सहित अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। बचाव पक्ष की दलीलों के बावजूद न्यायालय ने अभियोजन साक्ष्यों को विश्वसनीय माना।
माननीय न्यायाधीश महोदय ने अपने निर्णय में आरोपी को धारा 75/3 एवं धारा 79 BNS के अंतर्गत दोषी करार दिया। न्यायालय ने धारा 75/3 के तहत छह माह का कारावास एवं 25,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 79 BNS के अंतर्गत आरोपी को एक वर्ष का कारावास तथा 25,000 रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड लगाया गया।
न्यायालय ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में पद पर आसीन व्यक्तियों से उच्च आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
साक्ष्यों के आधार पर सुनाए गए इस फैसले को छात्राओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा के पक्ष में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह निर्णय समाज में यह स्पष्ट करता है कि शैक्षणिक परिसरों में किसी भी प्रकार के अशोभनीय आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




