
रेत माफियाओं का कहर: पुलिस कांस्टेबल की हत्या, हाईकोर्ट ने सरकार से कहा—अब बहुत हो चुका
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में रेत माफियाओं ने एक आरक्षक को ट्रैक्टर से कुचल दिया। सरेआम हत्या। एक जवान, जो सिस्टम की तरफ से अवैध खनन रोकने गया था, वहीं मारा गया। नाम था – शिवभजन सिंह।
अब सवाल ये है – क्या रेत माफिया सरकार से ज़्यादा ताकतवर हो चुके हैं?
घटना का सच:
लिब्रा घाट पर अवैध रेत खनन की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम पहुंची। लेकिन जैसे ही टीम ने माफियाओं को रोका, उन पर हमला हुआ। आरक्षक शिवभजन सिंह को ट्रैक्टर से रौंद दिया गया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
हमलावर झारखंड से आए थे। मतलब ये सिर्फ अवैध खनन नहीं, सीमापार संगठित अपराध है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख:
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घटना का स्वतः संज्ञान लिया। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस विभु दत्त गुरु की बेंच ने सरकार से पूछा – “जब खनन पर पहले से रोक है तो ये खनन कैसे हो रहा है? और हत्या तक की नौबत क्यों आई?”
कोर्ट ने सरकार को चेताया:
“राज्य के हालात बेहद गंभीर हैं। अगर अभी नहीं संभला गया, तो अगली मौत किसकी होगी?”
अगली सुनवाई 9 जून को है, लेकिन जनता की अदालत में सरकार की पेशी अभी से शुरू हो गई है।
सिस्टम के लिए सवाल नहीं, अब अलार्म है:
क्या माफिया अब कानून से ऊपर हैं?
पुलिस जवान की मौत का जिम्मेदार कौन?
आदेश देने वाले अफसर कहां थे जब हमला हुआ?
और सरकार… चुप क्यों है?
आरक्षक शिवभजन सिंह की शहादत किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं थी — ये उस सुस्त, लापरवाह और मिलीभगत वाले सिस्टम की कीमत है जिसे अब भी जनता झेल रही है।
अब अगर जवाब नहीं आया, तो ये चुप्पी और मौतें दोनों याद रखी जाएंगी।


