रजत जयंती के जश्न में चमका पूरा प्रदेश, लेकिन बलरामपुर में अटल जी की मूर्ति उपेक्षा की धूल में दबी

रजत जयंती के जश्न में चमका पूरा प्रदेश, लेकिन बलरामपुर में छत्तीसगढ़ के निर्माताओं को भुला दिया गया
अटल परिसर में धूल फांक रही मूर्ति — जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से लोगों में आक्रोश
बलरामपुर।
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की रजत जयंती पूरे प्रदेश में उल्लास और गर्व के साथ मनाई जा रही है। राजधानी से लेकर ब्लॉक स्तर तक जश्न का माहौल है। लेकिन इसी बीच बलरामपुर जिले से आई तस्वीरों ने इस उत्सव पर सवाल खड़ा कर दिया है।
यहां वह परिसर, जिसे राज्य के निर्माता और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में बनाया गया था, आज उपेक्षा की धूल में दबा हुआ है।
अटल परिसर बना उपेक्षा का प्रतीक
नगर पालिका ने कुछ वर्ष पहले लाखों रुपए की लागत से बलरामपुर शहर में “अटल परिसर” का निर्माण कराया था। परिसर में अटल जी की भव्य मूर्ति स्थापित की गई, ताकि आने वाली पीढ़ियां राज्य निर्माण के इतिहास और उनके योगदान को याद रख सकें।
लेकिन नगर पालिका की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि आज भी अटल जी की मूर्ति ढकी हुई है, उस पर धूल और जंग की परत जम चुकी है।
न परिसर की देखरेख हो रही है, न मूर्ति का अनावरण।
रजत जयंती पर भी नहीं दी गई श्रद्धांजलि
पूरे छत्तीसगढ़ में जहां राज्य निर्माण दिवस पर कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और सम्मान समारोह हुए, वहीं बलरामपुर में न जिला प्रशासन, न नगर पालिका और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने अटल जी या राज्य निर्माण के अन्य योगदानकर्ताओं को याद किया।
न कोई श्रद्धांजलि सभा हुई, न पुष्पांजलि कार्यक्रम।
लोगों का कहना है कि यह न केवल अटल जी के प्रति, बल्कि पूरे राज्य निर्माण आंदोलन की भावना के प्रति अपमान है।

स्थानीय लोगों का आक्रोश
स्थानीय नागरिकों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा —
“जब पूरा प्रदेश रजत जयंती का जश्न मना रहा है, तब बलरामपुर में अटल जी की मूर्ति की यह हालत देखना दुखद है। यह वही नेता हैं जिनकी दूरदृष्टि से छत्तीसगढ़ अस्तित्व में आया। आज उनके नाम के परिसर में सन्नाटा है, मूर्ति धूल फांक रही है, और प्रशासन मौन है।”
लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि परिसर की सफाई कर मूर्ति का अनावरण किया जाए और अटल जी सहित राज्य निर्माण में योगदान देने वाले नेताओं को सम्मान दिया जाए।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
नगर पालिका और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति और कार्यक्रम न होने से आम जनता में यह धारणा बन रही है कि बलरामपुर में राज्य निर्माण के प्रति सम्मान केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है।
जनता का सवाल — “अटल जी को भुलाकर किसका जश्न?”
रजत जयंती का मकसद राज्य निर्माण की उस ऐतिहासिक यात्रा को याद करना है, जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी जी की निर्णायक भूमिका रही।
उनके प्रयासों से 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ भारत का 26वां राज्य बना। लेकिन 25 साल बाद, जब पूरा प्रदेश गर्व महसूस कर रहा है, बलरामपुर में वही स्मारक भूले-बिसरे कोने में धूल खा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है —
“अगर राज्य के निर्माता को ही याद नहीं किया जाएगा, तो ऐसे समारोहों का क्या मतलब रह जाएगा? यह सिर्फ दिखावे का उत्सव बनकर रह गया है।”
जनता की मांग
लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि अटल परिसर की मरम्मत और सौंदर्यीकरण किया जाए, मूर्ति का सार्वजनिक अनावरण हो, और बलरामपुर को भी राज्य निर्माण के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के ठोस प्रयास किए जाएं।
छत्तीसगढ़ की रजत जयंती आत्मसम्मान और उपलब्धियों का प्रतीक है। लेकिन बलरामपुर में अटल जी की मूर्ति पर जमी धूल यह याद दिलाती है कि सम्मान केवल भाषणों से नहीं, कर्म से दिखता है।
जब तक प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस उपेक्षा को दूर नहीं करते, तब तक जनता का यह सवाल गूंजता रहेगा —
“अटल जी की मूर्ति धूल में क्यों?”

