
बलरामपुर-रामानुजगंज (छ.ग.) | 06 जून 2024
अनुविभागीय अधिकारी (रा.) द्वारा जारी एक आदेश के तहत जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चावल के अग्रिम भंडारण एवं एकमुश्त वितरण की जिम्मेदारी प्राथमिक शालाओं के अतिशेष शिक्षकों सहित अन्य कर्मचारियों को सौंपी गई है। इस आदेश के बाद से शिक्षक संगठनों और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
आदेश के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार जून से अगस्त 2025 की राशन सामग्री का वितरण 30 जून 2025 तक पूर्ण किया जाना है। इस कार्य हेतु तहसील स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, और उनके निर्देशन में कर्मचारियों को राशन वितरण हेतु तैनात किया गया है। कई शिक्षकों को भी इन ड्यूटियों में शामिल किया गया है।

शिक्षकों का विरोध:
शिक्षकों ने इस आदेश पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उनका कार्यक्षेत्र शिक्षा है, न कि खाद्यान्न वितरण। शिक्षकों का कहना है कि पहले ही शिक्षकों की संख्या कम है, ऐसे में उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
शिक्षक संगठनों की प्रतिक्रिया:
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ एवं अन्य संगठनों ने आदेश को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन युक्तियुक्तकरण की आड़ में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाकर शिक्षा व्यवस्था को और कमजोर कर रहा है।
प्रशासन का पक्ष:
प्रशासन का तर्क है कि यह नियुक्ति अस्थायी है और केवल तीन माह के राशन वितरण की प्रक्रिया को समय पर और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने हेतु की गई है। जिन शिक्षकों को ड्यूटी पर लगाया गया है, वे “अतिशेष” माने गए हैं, यानी वर्तमान में उन्हें किसी विद्यालय में अध्यापन कार्य नहीं सौंपा गया है।







