
शासन के आदेशों की अनदेखी!बलरामपुर नगरपालिका में ट्रांसफर लिस्ट पर नहीं हो रहा अमल शासन की स्पष्ट मंशा के बावजूद अफसरशाही हावी — दो महीने बाद भी कर्मचारी पदस्थापना आदेशों से बाहर नहीं हुए
बलरामपुर नगरपालिका में ट्रांसफर लिस्ट पर नहीं हो रहा अमल शासन की स्पष्ट मंशा के बावजूद अफसरशाही हावी — दो महीने बाद भी कर्मचारी पदस्थापना आदेशों से बाहर नहीं हुए
बलरामपुर। नगरीय प्रशासन विभाग के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए बलरामपुर नगरपालिका में अफसरशाही का रवैया खुलकर सामने आ गया है। विभाग द्वारा 18 सितंबर 2025 को जारी ट्रांसफर लिस्ट के बाद भी अब तक आदेशों का पालन नहीं हुआ है। सूची में शामिल नगरपालिका के दो कर्मचारी — एक लेखापाल और एक उप अभियंता — को नए स्थानों पर पदस्थापित किया गया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक रिलीव नहीं किया गया है।
शासन ने दिए थे सख्त निर्देश
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि ट्रांसफर लिस्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर सभी अधिकारी और कर्मचारी अपनी नई पदस्थापना स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करें। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि जो अधिकारी आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय स्तर पर टालमटोल
सूत्रों के अनुसार, नगरपालिका बलरामपुर प्रशासन ने इस आदेश को लेकर न तो संबंधित कर्मचारियों को रिलीव किया और न ही विभाग को इसकी जानकारी दी। बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव के चलते यह फाइल जानबूझकर अटकी हुई है। इससे शासन की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं और यह चर्चा तेज है कि आखिर किन कारणों से नगरपालिका अधिकारी शासन के आदेशों को नजरअंदाज करने का साहस कर रहे हैं।
प्रशासनिक अनुशासन पर उठ रहे सवाल
इस मामले ने स्थानीय प्रशासनिक अनुशासन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। जब शासन का आदेश सार्वजनिक रूप से जारी हो चुका है, तो उसका पालन न करना सीधे-सीधे अवहेलना की श्रेणी में आता है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में देरी या अनदेखी शासन की साख को नुकसान पहुंचाती है और निचले स्तर पर मनमानी को बढ़ावा देती है।
शासन की सख्ती पर निगाहें
अब सभी की नजर शासन पर है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है। अगर इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई नहीं की गई, तो यह एक गलत उदाहरण साबित होगा। प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि शासन को न केवल जिम्मेदार अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय करनी चाहिए।
नागरिकों में भी रोष
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी नाराज़गी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर शासन के आदेशों की अनदेखी नगरपालिकाओं में खुलेआम होगी, तो सामान्य जनता से नियमों के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।
बलरामपुर नगरपालिका का यह मामला सिर्फ दो कर्मचारियों के ट्रांसफर तक सीमित नहीं है। यह पूरे प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही और अनुशासन की कमी का संकेत है। अब गेंद शासन के पाले में है — देखना यह होगा कि क्या इस बार केवल चेतावनी दी जाएगी या वास्तव में सख्त कदम उठाए जाएंगे।


