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EE के अधीन PMGSY और RES में खुलेआम लापरवाही, सरकार की ‘मजबूरी’ अब सवालों के घेरे में

बलरामपुर में जनजातीय विकास योजनाएं बनी मज़ाक: सड़क और स्कूल उन्नयन में खुली लूट, EE दोनों विभागों के मुखिया, सरकार की चुप्पी पर सवाल

बलरामपुर। आदिवासी उत्थान की बात करने वाली सरकार की योजनाएं बलरामपुर में मज़ाक बनकर रह गई हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना और मुख्यमंत्री जतन योजना—दोनों ही बहुप्रचारित विकास योजनाएं जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं। सेमर तला की पहाड़ी कोरवा बसाहट तक बन रही सड़क हो या स्कूलों का उन्नयन—हर जगह सिर्फ घटिया निर्माण, पैसों की लूट और सरकारी उदासीनता देखने को मिल रही है।

ग्रामीणों का साफ आरोप है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बन रही सड़क में न तो तय मानकों का पालन हो रहा है और न ही अधिकारी मौके पर झांकने आते हैं। वहीं मुख्यमंत्री जतन योजना के अंतर्गत जिन स्कूलों को नया जीवन मिलना था, वहाँ आज भी बच्चे वैसे  ही भवनों में पढ़ने को मजबूर हैं—क्योंकि पैसा तो आया, लेकिन काम सिर्फ कागज़ों में हुआ।

चौंकाने वाली बात यह है कि इन दोनों योजनाओं की कमान एक ही EE के हाथ में है,  एक ही अधिकारी के पास PMGSY और RES जैसे दो महत्त्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई—यह सवाल अब जनता से लेकर जनप्रतिनिधियों तक की जुबान पर है। क्या सरकार के पास अधिकारियों की इतनी कमी है, या फिर यह जानबूझकर भ्रष्टाचार को खुली छूट देने की रणनीति है?

बलरामपुर जिले का PMGSY कार्यालय लेंस से ढूंढने के बावजूद भी नहीं मिलता तो अधिकारी कहां मिलेंगे ग्रामीण शिकायत के लिए भटकते रहते हैं



बलरामपुर PMGSY कार्यालय में SDO जो  लगभग 8 से 10 साल की जमी जमाई पोस्टिंग हे। जो कई  सवालों को जन्म दे दिया है। वर्षों की तैनाती और ठेकेदारों से नजदीकी—यही वजह है कि जिले में चल रहे निर्माण कार्यों में घोर अनियमितता, घटिया सामग्री और लापरवाही खुलेआम दिखती है।

कलेक्टर ने मामले की जांच की बात कही है, लेकिन जनता का भरोसा अब केवल जांच आश्वासन पर नहीं है। अगर वास्तव में आदिवासी विकास की नीयत है, तो दोषियों पर ज़िम्मेदारी तय करना ज़रूरी है—वरना योजनाएं यूं ही लूट का साधन बनी रहेंगी।

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