प्रधानपाठक लक्ष्मी नारायण सोनी स्वतंत्रता दिवस पर भी अनुपस्थित, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की शिकायत

बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के ग्राम शिवपुर की प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक लक्ष्मी नारायण सोनी पर लगातार अनुपस्थित रहने और अपने कर्तव्यों की अनदेखी करने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2022 से अब तक सोनी न तो विद्यालय में नियमित रूप से उपस्थित रहे हैं और न ही 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) एवं 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर विद्यालय पहुँचे।

चार साल से लापरवाही
ग्रामीणों का कहना है कि सोनी चार वर्षों में कभी-कभी विद्यालय आते हैं, उस दिन औपचारिकता निभाते हुए हाजिरी दर्ज कराते हैं और फिर विद्यालय से गायब हो जाते हैं। बच्चों ने भी स्वीकार किया कि उनके प्रधानपाठक शायद ही कभी पढ़ाने आते हों।
राजनीतिक पहुँच और डिप्टी से बचते रहे
ग्रामीणों के अनुसार, सोनी अपने राजनीतिक संपर्कों और अधिकारियों तक पहुँच का फायदा उठाकर बार-बार निर्वाचन कार्य के लिए अपनी जगह डिप्टी लगवाते रहे हैं। जबकि 14 मई 2025 को अनुभागीय अधिकारी ने उन्हें मूल पदस्थ संस्था के लिए कार्यमुक्त किया था, लेकिन इसके बावजूद वे विद्यालय नहीं पहुँचे।

ग्रामीणों की तुलना – निष्ठा बनाम लापरवाही
ग्रामीणों ने उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ शिक्षक पंकज रोज़ाना 8 किलोमीटर लंबी पहाड़ी और जंगल पार कर विद्यालय पहुँचते हैं, बच्चों को पढ़ाते हैं और राष्ट्रीय पर्वों पर झंडा फहराते हैं, वहीं प्रधानपाठक सोनी विद्यालय की ओर झाँकते तक नहीं।
कलेक्टर को भेजा आवेदन
प्रधानपाठक की इस लापरवाही से नाराज़ ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से कलेक्टर को लिखित आवेदन और व्हाट्सएप संदेश के जरिए शिकायत भेजी है। ग्रामीणों की माँग है कि –
1. प्रधानपाठक को तत्काल हटाया जाए।
2. विद्यालय में जिम्मेदार शिक्षक की नियुक्ति हो।
3. उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो, जिनकी मिलीभगत या लापरवाही से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
अधिकारियों की सफाई
इस मामले में विकासखंड शिक्षा अधिकारी सदानंद सिंह कुशवाह ने कहा –
“शिकायत प्राप्त हुई है। जांच की जाएगी और आगे आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
पहले भी लगे हैं आरोप
गौरतलब है कि सोनी की पूर्व पदस्थापना चाकी में रही थी, जहाँ ग्रामीणों ने उन पर विद्यालय में अनुपस्थित रहने की शिकायत की थी। उस समय कार्रवाई करते हुए उनका स्थानांतरण शिवपुर कर दिया गया था।
अब देखना यह होगा कि इस बार भी जांच केवल कागज़ों तक सीमित रहती है या फिर सचमुच में लापरवाह प्रधानपाठक के खिलाफ ठोस कार्रवाई होती है।


