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पति की मृत्यु के बाद पासबुक के लिए भटक रही महिला, दो दिनों से बैंक के चक्कर काटने को मजबूर

पति की मृत्यु के बाद पासबुक के लिए भटक रही महिला, दो दिनों से बैंक के चक्कर काटने को मजबूर


रामानुजगंज। बलरामपुर जिले के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, अंबिकापुर की रामानुजगंज शाखा में एक महिला अपने दिवंगत पति के साथ संचालित संयुक्त खाते (ज्वाइंट अकाउंट) को अलग करवाकर नई पासबुक प्राप्त करने के लिए पिछले कई दिनों से भटक रही है। आरोप है कि बैंक प्रबंधन द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण महिला को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत रामचंद्रपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलकुर्ता निवासी लीलावती गुप्ता, पति स्वर्गीय गोपाल गुप्ता, अपने पुत्र के साथ रामानुजगंज पहुंची हैं। उनके पति का निधन 23 मार्च 2026 को हो गया था। महिला का कहना है कि पति की मृत्यु के बाद उन्होंने नियमानुसार बैंक को सूचना देने के साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र भी जमा कर दिया था, ताकि संयुक्त खाते को उनके नाम पर संचालित किया जा सके और अलग से पासबुक जारी हो सके।

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महिला के अनुसार, सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद अब तक उन्हें नई पासबुक नहीं मिल सकी है। पासबुक बनवाने के लिए वह पिछले दो दिनों से रामानुजगंज में ही रुकी हुई हैं। दूरस्थ क्षेत्र से आने के कारण उन्हें अपने पुत्र के साथ धर्मशाला में ठहरना पड़ा है। वहीं इसके पूर्व भी महिला और उनके लड़के कई बार आ चुके हैं


बताया जा रहा है कि ग्राम बेलकुर्ता रामानुजगंज मुख्यालय से लगभग 41 किलोमीटर दूर स्थित है। शाम 4 बजे के बाद उस क्षेत्र के लिए बस सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण महिला को मजबूरी में रामानुजगंज में ही रुकना पड़ा। इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों द्वारा उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।
महिला ने बताया कि उनके पति कृषि कार्य करते थे और धान विक्रय की राशि भी इसी खाते में जमा होती थी। पासबुक नहीं मिलने और खाते की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वह अपने खाते से राशि का संचालन नहीं कर पा रही हैं। इससे परिवार के दैनिक खर्च और जीवनयापन पर भी संकट खड़ा हो गया है।
महिला का यह भी आरोप है कि बैंक शाखा प्रबंधक द्वारा उनके पुत्र को डांट-फटकार कर बैंक परिसर से बाहर निकाल दिया गया। वहीं खबर लिखे जाने तक शाम करीब 8 बजे तक महिला बैंक के बाहर बैठी रही, लेकिन किसी अधिकारी या कर्मचारी ने उनकी समस्या के समाधान के लिए पहल नहीं की।


अब देखना होगा कि बैंक प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित महिला को कब तक राहत मिल पाती है। स्थानीय लोगों ने भी मामले की जांच कर शीघ्र समाधान की मांग की है।

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