उबका बांध में रिसाव से बढ़ी दहशत, 100 एकड़ फसल और 10-15 घरों पर मंडरा रहा खतरा
बारिश के बीच उबका बांध में रिसाव, प्रशासन के निरीक्षण के बाद भी मरम्मत का इंतजार
उबका बांध में रिसाव से ग्रामीणों में दहशत, 100 एकड़ फसल और 10-15 घरों पर मंडरा रहा खतरा
बलरामपुर/रामचन्द्रपुर। बलरामपुर जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच रामचन्द्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत नीलकंठपुर स्थित उबका बांध में पानी का रिसाव शुरू होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बांध के निचले हिस्से से लगातार पानी बाहर निकल रहा है। ग्रामीणों ने समय रहते प्रशासन और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी देकर फोटो-वीडियो भी भेजे हैं। शिकायत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और विभागीय कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण भी किया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि रिसाव को रोकने के लिए अब तक कोई ठोस और स्थायी पहल नहीं की गई है।
लगातार बारिश के बीच बांध में पानी का दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में ग्रामीणों को डर है कि यदि रिसाव बढ़ा तो बांध की संरचना प्रभावित हो सकती है और स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक बांध के नीचे करीब 100 एकड़ कृषि भूमि में लगी फसल और नदी किनारे बसे 10 से 15 मकान संभावित खतरे की जद में आ सकते हैं।
लगातार रिस रहा पानी, बढ़ रही ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों के अनुसार उबका बांध के निचले हिस्से से लगातार पानी रिस रहा है। पानी बांध के नीचे की मिट्टी से होकर बाहर निकल रहा है और बारिश के साथ रिसाव की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआत में रिसाव अपेक्षाकृत कम था, लेकिन लगातार बारिश के कारण इसे नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। ग्रामीण चाहते हैं कि बांध की स्थिति का केवल सामान्य निरीक्षण ही नहीं, बल्कि विशेषज्ञों से तकनीकी जांच कराकर रिसाव के कारण और खतरे का आकलन किया जाए।

कलेक्टर को भेजे फोटो-वीडियो, अधिकारियों ने किया निरीक्षण
ग्रामीणों ने बांध में हो रहे रिसाव की जानकारी जिला कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को दी। इसके साथ ही बांध की मौजूदा स्थिति के फोटो और वीडियो भी प्रशासन तक पहुंचाए गए।
बताया गया है कि कलेक्टर के निर्देश के बाद एसडीएम, तहसीलदार, वन विभाग के कर्मचारी सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे और बांध का निरीक्षण किया। अधिकारियों द्वारा मौके की स्थिति देखने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद थी कि तत्काल मरम्मत और रिसाव रोकने की कार्रवाई शुरू होगी।
हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण के बावजूद अभी तक रिसाव रोकने के लिए अपेक्षित स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है। बारिश लगातार जारी रहने के कारण ग्रामीण प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

100 एकड़ फसल पर मंडरा रहा नुकसान का खतरा
उबका बांध क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण साधन है। ग्रामीणों के मुताबिक बांध से आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान अपनी कृषि भूमि की सिंचाई करते हैं। वर्तमान में करीब 100 एकड़ में फसल लगी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध की स्थिति बिगड़ती है और पानी का तेज बहाव खेतों की ओर पहुंचता है तो खड़ी फसल को भारी नुकसान हो सकता है। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ खेती का पूरा सीजन प्रभावित होने की आशंका है।
10-15 घरों पर भी संभावित खतरा
बांध के निचले हिस्से और नदी किनारे करीब 10 से 15 घर स्थित बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बांध में रिसाव बढ़ता है या किसी कारण से बांध का हिस्सा क्षतिग्रस्त होता है तो इन घरों तक पानी पहुंचने का खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों की चिंता केवल फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें घरों और लोगों की सुरक्षा को लेकर भी डर बना हुआ है। उनका कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को पहले से तैयारी करनी चाहिए।

वर्ष 2008 में हुआ था उबका बांध का निर्माण
ग्रामीणों के अनुसार उबका बांध का निर्माण वर्ष 2008 में कराया गया था। निर्माण के बाद से यह क्षेत्र के किसानों के लिए सिंचाई का महत्वपूर्ण जलस्रोत बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बांध की लगातार उपयोगिता को देखते हुए इसकी नियमित निगरानी और समय-समय पर आवश्यक मरम्मत जरूरी है। बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने से पहले बांध के कमजोर हिस्सों की पहचान कर उन्हें मजबूत किया जाना चाहिए।
2017 में भी क्षतिग्रस्त हुआ था बांध
ग्रामीणों ने बताया कि उबका बांध वर्ष 2017 में भी क्षतिग्रस्त हुआ था। उस समय भी बांध की स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को जानकारी दी थी। ग्रामीणों के अनुसार तत्काल पर्याप्त मदद नहीं मिलने पर उन्होंने स्वयं आपस में चंदा जुटाकर वर्ष 2018 में बांध की मरम्मत कराई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में जिस स्थान से पानी का रिसाव हो रहा है, वह 2017 में क्षतिग्रस्त हुए हिस्से से कुछ आगे है। इस वजह से पुराने अनुभव के कारण ग्रामीण इस बार ज्यादा चिंतित हैं।
ग्रामीणों ने अपने स्तर पर जेसीबी से मरम्मत की कोशिश की
ग्रामीणों के अनुसार जब उन्हें बांध में रिसाव की जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के साथ अपने स्तर पर भी रिसाव रोकने का प्रयास किया। इसके लिए जेसीबी लगाकर बांध के कमजोर हिस्से में मिट्टी डालने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने की कोशिश की गई।
रामानुजगंज कांग्रेस मंडल अध्यक्ष राजेंद्र श्रीवास के अनुसार बांध की मरम्मत के लिए ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव से भी मदद मांगी गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत की ओर से पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। इस दौरान सरपंच की ओर से 2 हजार रुपये दिए जाने की बात भी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी गंभीर स्थिति में केवल ग्रामीणों के स्तर पर किए गए अस्थायी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। बांध की तकनीकी स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की टीम द्वारा स्थायी समाधान किया जाना जरूरी है।
जल संसाधन, कृषि और वन विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने बांध की मौजूदा स्थिति को लेकर जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग और वन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सूचना दिए जाने के बावजूद अभी तक सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय दिखाई नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों की मांग है कि जल संसाधन विभाग के तकनीकी अधिकारियों को मौके पर बुलाकर बांध की संरचना और रिसाव की जांच कराई जाए। वहीं कृषि विभाग को संभावित फसल नुकसान का आकलन करने और प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने की जरूरत है।
लुत्ती बांध हादसे की याद ने बढ़ाई चिंता
उबका बांध को लेकर ग्रामीणों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पिछले वर्ष बलरामपुर विकासखंड के ग्राम लुत्ती में भारी बारिश के दौरान बांध टूटने की घटना सामने आई थी। 2 और 3 सितंबर की दरमियानी रात भारी बारिश के बीच करीब 40 साल पुराना लुत्ती बांध टूट गया था।
बांध टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी गांव की ओर पहुंचा था। इस हादसे में लोगों की मौत के साथ मवेशियों के बहने, मकानों और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनी थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में बांधों की सुरक्षा और बारिश के दौरान उनकी निगरानी को लेकर चिंता बढ़ा दी थी।
उबका के ग्रामीणों का कहना है कि लुत्ती जैसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए बांध में दिखाई दे रहे रिसाव को अभी से गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने की तकनीकी जांच और तत्काल मरम्मत की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उबका बांध की तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए। बांध के किस हिस्से से पानी रिस रहा है, रिसाव का कारण क्या है और बांध की संरचना कितनी सुरक्षित है, इसका विशेषज्ञों से परीक्षण कराया जाए।
इसके साथ ही जरूरत के अनुसार बांध की मरम्मत, कमजोर हिस्सों को मजबूत करने और पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश जारी रहने के दौरान यदि रिसाव बढ़ता है तो बाद में कार्रवाई करना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर
फिलहाल उबका बांध के निचले हिस्से से पानी का रिसाव जारी बताया जा रहा है और क्षेत्र में बारिश का दौर भी बना हुआ है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच लगातार चिंता का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी अनहोनी का इंतजार नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि बांध टूटने के बाद राहत और बचाव कार्य करने के बजाय पहले से दिखाई दे रहे खतरे को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग बांध की मौजूदा स्थिति को कितनी गंभीरता से लेते हैं और करीब 100 एकड़ फसल तथा नदी किनारे बसे 10-15 घरों की सुरक्षा के लिए कितनी जल्दी ठोस कदम उठाए जाते हैं।



