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Khabar30.in की खबर का असर: महावीरगंज केमिकल प्लांट में पहुंची जांच टीम, नदी से लिया पानी का सैंपल

Khabar30.in की खबर का असर: महावीरगंज केमिकल प्लांट में पहुंची संयुक्त जांच टीम, नदी से लिया पानी का सैंपल

बलरामपुर-रामानुजगंज। ग्राम पंचायत महावीरगंज स्थित ग्रेफाइट केमिकल प्लांट से कथित तौर पर रसायनयुक्त पानी नदी में छोड़े जाने और इससे ग्रामीणों, किसानों तथा पशुधन को नुकसान होने की शिकायत का जिला प्रशासन ने संज्ञान लिया है। Khabar30.in पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई तेज हुई है। कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच टीम महावीरगंज पहुंची और नदी के साथ-साथ केमिकल प्लांट के अंदर चल रहे कामकाज का भी जायजा लिया।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि प्लांट से निकलने वाला गंदा और रसायनयुक्त पानी बिना उचित ट्रीटमेंट के सीधे पास की नदी में छोड़ा जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी के पानी का उपयोग किसान धान सहित अन्य फसलों की सिंचाई के लिए करते हैं, जिससे फसलों को नुकसान होने की बात सामने आई है। वहीं नदी का पानी पीने से मवेशियों के असमय मरने तथा रसायनयुक्त पानी के संपर्क में आने से ग्रामीणों को त्वचा संबंधी परेशानियां होने के भी आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत के बाद छह सदस्यीय टीम गठित

मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यालय कलेक्टर, बलरामपुर-रामानुजगंज द्वारा जांच के लिए छह सदस्यीय संयुक्त टीम का गठन किया गया। टीम में तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी रामानुजगंज मनोज कुमार पैकरा, कार्यपालन अभियंता जल संसाधन विभाग एन.पी. डहरिया, खनि अधिकारी राहुल गुलाटी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत रामचन्द्रपुर रणवीर साय, चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजगंज महेश गुप्ता तथा पशु चिकित्सा अधिकारी एस.एस. सेंगर को शामिल किया गया है।

प्रशासन ने टीम को शिकायत की जांच कर तीन दिवस के भीतर संयुक्त हस्ताक्षरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

नदी के पानी का लिया सैंपल

संयुक्त जांच टीम ने महावीरगंज पहुंचकर सबसे पहले नदी और आसपास के क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान नदी के पानी का सैंपल भी लिया गया है। पानी की जांच से नदी में किसी प्रकार के रासायनिक या अन्य प्रदूषक तत्वों की मौजूदगी का पता लगाने में मदद मिलेगी।

जांच टीम द्वारा मौके की स्थिति, नदी में पानी के प्रवाह और प्लांट से निकलने वाले पानी की व्यवस्था को लेकर भी जानकारी जुटाई गई।

प्लांट के अंदर चल रहे कामकाज का भी लिया जायजा

संयुक्त टीम ने केवल नदी तक सीमित रहकर जांच नहीं की, बल्कि ग्रेफाइट केमिकल प्लांट के अंदर जाकर वहां चल रहे कामकाज और विभिन्न गतिविधियों का भी जायजा लिया। टीम ने प्लांट परिसर में मौजूद अधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली और वहां पानी के निकासी एवं अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में भी जानकारी जुटाई।

प्लांट के अंदर निरीक्षण किए जाने से जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है। अब टीम द्वारा मौके पर जुटाई गई जानकारी, नदी से लिए गए पानी के सैंपल और ग्रामीणों की शिकायत के तथ्यों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।

नदी में पानी नहीं छोड़ने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान संयुक्त टीम ने प्लांट में मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी सूरत में रसायनयुक्त या गंदा पानी नदी में नहीं छोड़ा जाए। प्रशासन की ओर से दिए गए इस निर्देश के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्लांट से निकलने वाले पानी के निस्तारण की व्यवस्था किस प्रकार की जा रही है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी में प्रदूषण की शिकायत की निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाए। उनका कहना है कि नदी का पानी खेती, पशुओं और ग्रामीणों के दैनिक उपयोग से जुड़ा है, इसलिए किसी भी प्रकार के प्रदूषण को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

10 से अधिक बार शिकायत का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट से निकलने वाले कथित रसायनयुक्त पानी को लेकर वे स्थानीय स्तर पर और प्लांट प्रबंधन से 10 से अधिक बार मौखिक शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन को दी शिकायत में फसलों को नुकसान, पशुओं की मौत और लोगों में त्वचा संबंधी समस्याओं सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

कलेक्टर के निर्देश पर गठित संयुक्त टीम द्वारा मौके का निरीक्षण किए जाने और नदी के पानी का सैंपल लिए जाने के बाद अब ग्रामीणों की निगाह जांच रिपोर्ट पर टिकी है। प्रशासन ने टीम को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

यदि जांच में नदी के पानी के प्रदूषित होने और प्लांट से निकलने वाले पानी के बीच संबंध सामने आता है, तो संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे नदी, पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

फिलहाल संयुक्त जांच टीम के निरीक्षण के बाद महावीरगंज के ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।

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