कृषि मजदूर के बेटे अरविंद ने रचा इतिहास, NEET में सफलता के बाद रायपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए चयन

पहली असफलता से नहीं मानी हार, दूसरे प्रयास में NEET क्वालिफाई कर डॉक्टर बनने की राह पर अरविंद
कृषि मजदूर परिवार के बेटे ने कठिन परिस्थितियों को दी मात, PVTG वर्ग में छठे स्थान पर रहकर बढ़ाया पंडो समाज का मान
रामचंद्रपुर/बलरामपुर, 11 सितंबर 2026।
सुदूर गांव की कठिन परिस्थितियां, परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति और पढ़ाई के लिए संसाधनों का अभाव। इन तमाम चुनौतियों के बीच पंडो जनजाति के एक युवा ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे पंडो समाज के लिए गर्व की बात है। बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम चुनापाथर निवासी अरविंद कुमार पंडो ने दूसरे प्रयास में NEET-2026 परीक्षा उत्तीर्ण कर डॉक्टर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनका चयन पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में MBBS की पढ़ाई के लिए हुआ है।
अरविंद की सफलता इसलिए भी खास है, क्योंकि वे विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह यानी PVTG वर्ग से आते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने छत्तीसगढ़ में PVTG वर्ग के विद्यार्थियों के बीच छठा स्थान हासिल किया है। सीमित संसाधनों से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने की उनकी यह उपलब्धि पंडो समुदाय के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा के रूप में देखी जा रही है।
कृषि मजदूर पिता के बेटे ने मेहनत से बदली परिवार की तस्वीर
अरविंद कुमार एक साधारण कृषि मजदूर परिवार से आते हैं। उनके पिता रमेश प्रसाद पंडो कृषि मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी मां मुनिया देवी गृहिणी हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि महंगी कोचिंग और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का आसानी से इंतजाम किया जा सके। इसके बावजूद अरविंद ने पढ़ाई को अपना लक्ष्य बनाया और मेडिकल क्षेत्र में जाने का सपना देखा।
गांव के परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। उन्हें कई तरह की आर्थिक और शैक्षणिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने NEET की तैयारी जारी रखी।
पहले प्रयास में असफलता मिली, लेकिन हौसला नहीं टूटा
अरविंद ने NEET के लिए पहली बार प्रयास किया था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। यह असफलता उनके लिए निश्चित रूप से निराशाजनक थी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी मंजिल का अंत नहीं माना। इसके बजाय उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और दोबारा तैयारी शुरू की।
दूसरे प्रयास में अरविंद ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए NEET-2026 क्वालिफाई किया। इसके बाद मेडिकल कॉलेज में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी हुई और उन्हें रायपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए चयनित किया गया।
उनकी कहानी उन ग्रामीण और आदिवासी विद्यार्थियों के लिए विशेष संदेश देती है, जो पहली असफलता के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी छोड़ देते हैं। अरविंद ने साबित किया कि असफलता के बाद दोबारा प्रयास और निरंतर मेहनत से सफलता हासिल की जा सकती है।
डॉक्टर बनकर अपने समाज की सेवा करना चाहते हैं अरविंद
अरविंद का सपना केवल मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने तक सीमित नहीं है। वे डॉक्टर बनकर अपने समाज और क्षेत्र के लोगों की सेवा करना चाहते हैं। पंडो समुदाय के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता, शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए अरविंद भविष्य में अपने समाज के लिए काम करना चाहते हैं।
उनकी सफलता से पंडो समुदाय के अन्य विद्यार्थियों में भी उच्च शिक्षा और मेडिकल क्षेत्र में जाने का उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के लिए अरविंद की उपलब्धि यह संदेश देती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास किया जाए तो सफलता संभव है।

जिला प्रशासन ने किया सम्मानित
अरविंद की उपलब्धि की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भी उनकी सफलता को सराहा। उनकी उपलब्धि पर जिले की कलेक्टर ने उन्हें सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। प्रशासनिक स्तर पर भी अरविंद की सफलता को पंडो समुदाय के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, उनके MBBS में चयन की खबर मिलने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों ने भी उनके परिवार से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। बीपीएस पोया ने भी अरविंद के घर पहुंचकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पंडो विद्यार्थियों को NEET-JEE की तैयारी के लिए रायपुर भेजा गया
पंडो जनजाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने की दिशा में प्रशासन की ओर से भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मई 2026 में जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग की पहल पर सरगुजा संभाग से पंडो जनजाति के पांच होनहार विद्यार्थियों का चयन उच्च स्तरीय आवासीय कोचिंग के लिए किया गया।
इन विद्यार्थियों को NEET और JEE जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए राजधानी रायपुर भेजा गया है। वहां उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य पंडो समुदाय के विद्यार्थियों को मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ना और उन्हें मेडिकल तथा इंजीनियरिंग जैसी पेशेवर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है।
पंडो समाज में शिक्षा की नई उम्मीद
सरगुजा संभाग में पंडो जनजाति विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय समूहों में शामिल है। लंबे समय से इस समुदाय के सामने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक संसाधनों से जुड़ी कई चुनौतियां रही हैं। ऐसे में समुदाय के किसी विद्यार्थी का NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना सामान्य उपलब्धि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अरविंद कुमार की सफलता ऐसे समय में सामने आई है, जब पंडो विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जोड़ने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आने वाले वर्षों में पंडो समुदाय से NEET, JEE और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
अरविंद की सफलता बनेगी आने वाली पीढ़ी की प्रेरणा
अरविंद कुमार की कहानी केवल एक विद्यार्थी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, मेहनत और अवसर मिलने पर आगे बढ़ने की क्षमता की कहानी भी है। कृषि मजदूर परिवार से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उनके लिए बड़ी उपलब्धि है।
पहले प्रयास में असफल होने के बाद दूसरे प्रयास में NEET क्वालिफाई करना और फिर रायपुर मेडिकल कॉलेज में MBBS के लिए चयनित होना पंडो समाज के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनकी सफलता से समुदाय के अन्य बच्चों को भी बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने की प्रेरणा मिलेगी।
अब अरविंद के सामने MBBS की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर बनने का लक्ष्य है। वे चाहते हैं कि भविष्य में उनके समाज का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक या संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से पीछे न रह जाए। यही सोच उनकी सफलता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है।
- अरविंद की उपलब्धि ने यह साबित किया है कि अगर प्रतिभा को मेहनत, सही मार्गदर्शन और अवसर मिल जाए तो सुदूर गांव का एक साधारण परिवार का बच्चा भी मेडिकल कॉलेज तक पहुंच सकता है। पंडो समाज के लिए यह सफलता निश्चित रूप से शिक्षा के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत है।


