कोरियाछत्तीसगढ़

भगवान श्री राम वन गमन पथ काव्य रथ यात्रा की मनेंद्रगढ़ में स्वागत की तैयारियां प्रारंभ

कोरिया। भगवान पुरुषोत्तम श्री राम जी के वनवास काल में वनांचल के निवासियों के सहयोग की धन्यवाद गाथा लेकर श्री राम वन गमन पथ काव्य रथ यात्रा का छत्तीसगढ़ पदार्पण हो चुका है. श्री लंका से अयोध्या तक की यह काव्य मय यात्रा रायपुर से आगे शिवरीनारायण, रायगढ़, जशपुर एवं 30 मार्च को अंबिकापुर से होते हुए मनेंद्रगढ़ से गुजरेगी. भगवान श्री राम की गौरव गाथा की काव्य पुष्पांजलि हर रात्रि पड़ाव पर आयोजित की जाती है. राष्ट्रीय कवि संगम मंच के कोरिया जिला संयोजक गौरव अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि  महाशिवरात्रि से प्रारंभ इस रथयात्रा का अंतिम पड़ाव रामनवमी को भगवान राम की जन्म स्थली अयोध्या में भव्य गरिमामयी काव्य धारा के साथ समाप्त होगी.  इस यात्रा का उद्देश्य भगवान राम के वनवास यात्रा के दौरान उनके मार्ग और उनके न्याय- अन्याय के मानवीय पक्ष  को  जन-जन तक पहुंचाना है.  इस मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगदीश मित्तल जी के साथ चर्चित कवि डॉ अशोक बत्रा,  संरक्षक चतुर्भुज अग्रवाल एवं  छत्तीसगढ़ प्रांताध्यक्ष  योगेश अग्रवाल,जैसे सेवभावी  संतों के मार्गदर्शन में संचालित इस यात्रा का  भव्य स्वागत किया जा रहा है. 30 मार्च को मनेंद्रगढ़ नगर स्वागत समिति के द्वारा इस रथ यात्रा का भव्य स्वागत की तैयारियां प्रारंभ कर दी गई है, जिसमें स्थानीय रचनाकार कलाकार गणमान्य नागरिकों सहित व्यापार संघ के सदस्यो के संयुक्त प्रयास से  भगवान श्री राम के चरण पादुका पूजन एवं रथ यात्रा की अगवानी की जाएगी. सुबह 10:00 बजे मनेंद्रगढ़ के प्रवेश द्वार पर शर्मा ऑटो सेंटर द्वार पर स्वागत के साथ साथ, आगे हनुमान मंदिर से महिला श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा, सहित पीडब्ल्यूडी तिराहे से व्यापार संघ के भव्य द्वार के स्वागत के साथ मोटरसाइकिल सवार एवं सम्माननीय नागरिको और जन समुदाय की भव्य रैली भगत सिंह तिराहे  से होते हुए राम मंदिर पहुंचेगी. जहां भगवान राम के पादुका पूजन एवं रथयात्रा में शामिल साहित्यकारों एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम आयोजित है. संबोधन  संस्था के संस्थापक वीरेंद्र श्रीवास्तव ने चर्चा के दौरान मनेंद्रगढ़ की विरासत को ऋषि मुनियों की तपस्थली के मध्य स्थित देवभूमि निरूपित किया. भगवान राम के वनवास काल में दंडकारण्य का यह यह क्षेत्र ऋषि मुनियों की तपस्थली रहा है. जिसमें भगवान श्रीराम ने अमृतधारा में वाम ऋषि एवं जटाशंकर में शस्त्रों का ज्ञान रखने वाले  ऋषि  निदाध से आशीर्वाद प्राप्त किया था. रथ यात्रा  नगर स्वागत समिति, मनेंद्रगढ़ द्वारा नागरिकों से नगर की गरिमा के अनुरूप इस यात्रा को अविस्मरणीय बनाने हेतु संभावित प्रयास एवं सहयोग की अपील की है.

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