न किताबें, न स्मार्ट क्लास… विद्यार्थियों ने खोला शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा
किताबें नहीं मिलीं, स्मार्ट क्लास बंद! विद्यार्थियों का फूटा आक्रोश

किताबें गायब, स्मार्ट क्लास बंद: 20 किमी दूर से पहुंचे विद्यार्थी, तीन दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन
जामवंतपुर हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई व्यवस्था पर सवाल, हेल्थ केयर और कंस्ट्रक्शन की पुस्तकें अब तक नहीं मिलीं
जिला शिक्षा कार्यालय पहुंचे विद्यार्थियों ने की नारेबाजी, सहायक संचालक ने लिया ज्ञापन और तीन दिन में समाधान का दिया आश्वासन
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में शैक्षणिक सत्र शुरू हुए काफी समय बीत जाने के बाद भी विद्यालयों में विद्यार्थियों को आवश्यक पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने और शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित होने का मामला सामने आया है। हायर सेकेंडरी स्कूल जामवंतपुर के विद्यार्थियों ने मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेतृत्व में जिला शिक्षा कार्यालय रामानुजगंज का घेराव किया। करीब 20 किलोमीटर दूर से अपनी कक्षाएं छोड़कर जिला मुख्यालय पहुंचे विद्यार्थियों ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर जमकर नाराजगी जताई।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि जामवंतपुर स्कूल में हेल्थ केयर एवं कंस्ट्रक्शन विषय की पाठ्य पुस्तकें अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। वहीं स्कूल में संचालित होने वाली स्मार्ट क्लास भी नियमित रूप से बंद है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब उन्होंने पढ़ाई को लेकर स्कूल प्रबंधन से समस्या बताई तो उन्हें मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं पढ़ाई करने की बात कही गई। एबीवीपी ने इस रवैये को विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति गंभीर लापरवाही बताते हुए नाराजगी जताई।

आधे घंटे तक गूंजते रहे नारे, अधिकारी नदारद
अपनी समस्याएं लेकर विद्यार्थी जिला शिक्षा कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां जिला शिक्षा अधिकारी मौजूद नहीं थे। विद्यार्थियों और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के अनुसार कार्यालय में केवल बड़े बाबू एवं कुछ कर्मचारी मौजूद थे। जिम्मेदार अधिकारी के कार्यालय में नहीं मिलने से विद्यार्थियों का आक्रोश और बढ़ गया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने करीब आधे घंटे तक “जिला शिक्षा अधिकारी मुर्दाबाद” और “होश में आओ” जैसे नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया। मामले की जानकारी फोन के माध्यम से सहायक संचालक को दी गई। उनके कार्यालय पहुंचने के बाद विद्यार्थियों की समस्याएं सुनी गईं और उनसे ज्ञापन लिया गया।
सहायक संचालक ने विद्यार्थियों को उनकी समस्याओं के तीन दिवस के भीतर निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बाद विद्यार्थियों ने चेतावनी दी कि तय समय सीमा में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो एबीवीपी के नेतृत्व में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

पुस्तकों की कमी और स्मार्ट क्लास बंद होने पर उठे सवाल
विद्यार्थियों ने मुख्य रूप से तीन मांगें जिला शिक्षा विभाग के समक्ष रखीं। इनमें हेल्थ केयर एवं कंस्ट्रक्शन विषय की पाठ्य पुस्तकें तत्काल उपलब्ध कराना, स्मार्ट क्लास को नियमित रूप से संचालित करना और परीक्षा शुल्क में की गई कथित अत्यधिक वृद्धि पर पुनर्विचार करना शामिल है।
एबीवीपी का कहना है कि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी विद्यार्थियों को विषयवार पुस्तकें नहीं मिलना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। संगठन ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पास यदि आवश्यक पाठ्य सामग्री ही उपलब्ध नहीं होगी तो उनकी पढ़ाई किस प्रकार सुचारू रूप से संचालित होगी।

जिला शिक्षा अधिकारी पर एबीवीपी ने लगाए गंभीर आरोप
एबीवीपी ने जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी का मुख्य कार्यालय रामानुजगंज में होने के बावजूद वे कार्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते और कलेक्टर कार्यालय स्थित अपने कक्ष में रहते हैं।
एबीवीपी का दावा है कि जिलेभर से विद्यार्थी, शिक्षक और आम लोग अपनी समस्याएं लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशान होकर वापस लौटना पड़ता है। कई लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बलरामपुर तक जाना पड़ता है।
संगठन ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवस के भीतर विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो एबीवीपी उग्र आंदोलन करेगी। आं
दोलन से उत्पन्न होने वाली स्थिति की संपूर्ण जवाबदेही शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन की होगी।



