12वीं बटालियन में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, ऑनलाइन ठगी से बचाव के बताए उपाय
फर्जी कॉल से लेकर ऑनलाइन निवेश तक, साइबर ठगी के तरीकों से रूबरू हुए जवान

12वीं बटालियन में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, ऑनलाइन ठगी से बचाव के बताए उपाय
अधिकारियों-कर्मचारियों एवं परिवारजनों को साइबर अपराध के बढ़ते खतरे से किया गया जागरूक, ठगी होने पर तत्काल 1930 पर सूचना देने की अपील
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। साइबर ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके बैंक खातों से रकम निकाल रहे हैं। ऐसे में साइबर अपराधों से बचाव और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 12वीं बटालियन छसबल, रामानुजगंज में साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वाहिनी के अधिकारी एवं कर्मचारियों तथा उनके परिवारजनों को साइबर अपराध, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल ठगी के नए-नए तरीकों से अवगत कराना तथा उन्हें साइबर अपराध से बचने के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी देना रहा। कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं और लोगों को किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी का शिकार होने से पहले सतर्क रहने की अपील की गई।

ठगी के अलग-अलग तरीकों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराध एवं ऑनलाइन ठगी के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि साइबर ठग अक्सर लोगों को डराकर, लालच देकर या विश्वास में लेकर उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करते हैं।
विशेष रूप से OTP के माध्यम से होने वाली ठगी, पुलिस अधिकारी, जांच अधिकारी अथवा बैंक अधिकारी बनकर फर्जी फोन कॉल करने, डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड का PIN, CVV और OTP हासिल करने, फर्जी लिंक एवं वेबसाइट के माध्यम से बैंकिंग जानकारी चुराने जैसे मामलों से सावधान रहने की जानकारी दी गई।

इसके अलावा इंश्योरेंस पॉलिसी अपडेट या नवीनीकरण, शेयर मार्केट में कम समय में अधिक लाभ कमाने का झांसा, नौकरी लगाने, लोन दिलाने तथा सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली ठगी के बारे में भी उपस्थित लोगों को जागरूक किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठग नए-नए तरीकों का इस्तेमाल करते हैं और कई बार प्रतिष्ठित संस्थाओं के नाम, लोगो या अधिकारियों की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों का विश्वास जीतने का प्रयास करते हैं। ऐसे में किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन, मैसेज या सोशल मीडिया संदेश पर तत्काल विश्वास करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है।

OTP, PIN और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा नहीं करने की अपील
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि OTP, ATM/डेबिट कार्ड PIN, CVV, UPI PIN, पासवर्ड और बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
यह भी बताया गया कि बैंक या किसी अन्य अधिकृत संस्था के नाम पर आने वाले संदिग्ध फोन कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी देने से बचें। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, इंश्योरेंस अधिकारी या किसी अन्य संस्था का प्रतिनिधि बताकर गोपनीय जानकारी मांगता है तो उस पर भरोसा करने के बजाय संबंधित संस्था के आधिकारिक माध्यम से संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
साइबर जागरूकता कार्यक्रम में लोगों को अनजान मोबाइल नंबरों से आने वाले मैसेज, संदिग्ध ई-मेल और सोशल मीडिया संदेशों को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई। किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने तथा फर्जी वेबसाइट और मोबाइल एप्लीकेशन पर व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी दर्ज नहीं करने के लिए कहा गया।
लालच और डर दोनों से सावधान रहने की जरूरत
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि साइबर ठगी के मामलों में अपराधी लोगों को कभी अधिक मुनाफे का लालच देते हैं तो कभी पुलिस कार्रवाई, बैंक खाता बंद होने या किसी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर तत्काल पैसा ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते हैं।
शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में पहले छोटे निवेश पर लाभ दिखाकर लोगों का भरोसा जीता जाता है और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने का प्रयास किया जाता है। इसी प्रकार नौकरी और लोन के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्क के नाम पर रकम वसूली जा सकती है।
अधिकारियों ने कहा कि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय साइबर ठगी का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी ऑनलाइन ऑफर, निवेश, नौकरी, लोन या भुगतान से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क
कार्यक्रम में साइबर ठगी के बाद की जाने वाली कार्रवाई के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो वह घबराए नहीं और मामले की जानकारी तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दे।
इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर भी शिकायत दर्ज करने की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी ही जल्दी संबंधित बैंकिंग लेनदेन पर कार्रवाई कर ठगी गई रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
इसलिए साइबर अपराध होने की स्थिति में पीड़ित को समय गंवाए बिना तत्काल शिकायत करने की सलाह दी गई।

अधिकारियों एवं साइबर सेल की टीम ने दी जानकारी
- कार्यक्रम में वाहिनी के सेनानी श्री दौलत राम पोर्ते, सहायक सेनानी लियोस कुजूर , HDFC बैंक रामानुजगंज के बैंक मैनेजर राकेश झा, रामानुजगंज थाना प्रभारी जितेंद्र सोनी तथा जिला बलरामपुर साइबर सेल की टीम ने साइबर अपराधों से बचाव के विभिन्न उपायों एवं आवश्यक सावधानियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने डिजिटल लेनदेन के दौरान सावधानी बरतने, अपने मोबाइल और बैंकिंग एप्लीकेशन को सुरक्षित रखने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तत्काल जानकारी संबंधित बैंक अथवा पुलिस को देने पर जोर दिया।
अधिकारी-कर्मचारी रहे उपस्थित
कार्यक्रम में वाहिनी के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सहायक सेनानी श्री लियोस कुजूर, कंपनी कमांडर श्री भारत भूषण गिरी, कंपनी कमांडर रूपनाथ राम, निरीक्षक जीवन किशोर कुजूर, सहायक उपनिरीक्षक बालम सिंह, P.C. अल्वीनुस बड़ा, APC अरुण कुमार, उदयवीर सिंह तथा साइबर टीम के राज कमल सैनी, मंगल सिंह, राज किशोर पैकरा सहित वाहिनी के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

परिवार और समाज को भी जागरूक करने का संदेश
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की गई कि साइबर सुरक्षा केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है। अपने परिवार के सदस्यों, बच्चों, बुजुर्गों तथा आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के नए तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी देने की बात कही गई।
कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता और जागरूकता है। अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने, संदिग्ध लिंक खोलने या अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचकर साइबर ठगी की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
कार्यक्रम के माध्यम से सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों को “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और साइबर अपराध के प्रति जागरूक रहें” का संदेश दिया गया।



