बलरामपुर-रामानुजगंज: हंसपुर मौत मामला, निलंबित एसडीएम करुण डहरिया अंबिकापुर सेंट्रल जेल शिफ्ट

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के हंसपुर गांव में ग्रामीण की मौत के मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। कुसमी के एसडीएम करुण डहरिया को पहले गिरफ्तार किया गया और अब 18 फरवरी को जारी शासनादेश के तहत निलंबित कर दिया गया है। सुरक्षा कारणों से उन्हें रामानुजगंज जेल से अंबिकापुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया जा रहा है।
जंगल में मारपीट, एक ग्रामीण की मौत
पुलिस के अनुसार, थाना कोरंधा में दर्ज अपराध क्रमांक 03/2026 के तहत 15 फरवरी 2026 की शाम हंसपुर के जंगल क्षेत्र में तीन ग्रामीणों के साथ मारपीट की सूचना मिली थी। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 62 वर्षीय राम उर्फ रामनरेश, पिता रेगहा, निवासी हंसपुर की उपचार के दौरान मौत हो गई। प्रारंभ में मर्ग क्रमांक 02/2026 कायम कर जांच शुरू की गई थी।


अवैध उत्खनन की जांच के दौरान विवाद
विवेचना में सामने आया कि 15 फरवरी की शाम कुसमी के एसडीएम करुण डहरिया अपने करीबी विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह(अध्यक्ष भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल कुसमी), मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव के साथ कथित अवैध बॉक्साइट उत्खनन की जांच के लिए हंसपुर जंगल पहुंचे थे। आरोप है कि इसी दौरान तीन ग्रामीणों पर अवैध उत्खनन का आरोप लगाते हुए उनके साथ मारपीट की गई। गंभीर रूप से घायल रामनरेश ने बाद में दम तोड़ दिया।
हत्या समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 103(1), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। 16 फरवरी को सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य चिकित्सकीय अभिमत के आधार पर आगे की जांच जारी है।

धरना, चक्का जाम और अंतिम संस्कार
घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर शिव चौक पर चक्का जाम कर प्रदर्शन किया गया। राजनीतिक सर गर्मी भी तेज रही आदिवासी समाज सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं ने भी धरना प्रदर्शन किया बाद में प्रशासनिक आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। मंगलवार देर शाम रामनरेश का शव उनके घर लाया गया। शव की स्थिति बिगड़ने की आशंका के चलते ग्रामीणों की उपस्थिति में रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

दो घायल अब भी इलाजरत
मारपीट में घायल अजीत उरांव और आकाश अगरिया का इलाज कुसमी स्वास्थ्य केंद्र में जारी है। दोनों की हालत चिकित्सकीय निगरानी में बताई जा रही है।
अंबिकापुर सेंट्रल जेल शिफ्ट
निलंबित एसडीएम करुण डहरिया को सुरक्षा कारणों से रामानुजगंज जेल से अंबिकापुर सेंट्रल जेल भेजा जा रहा है। बुधवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें अंबिकापुर के लिए रवाना किया गया। शासन के निलंबन आदेश के बाद यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और कानून व्यवस्था के लिहाज से जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
करुण डहरिया (एसडीएम) को में
विशेष ट्रीटमेंट क्यों दिया जा रहा है?
जबकि—
• जिले के आदिवासी सहित सभी कैदी विचाराधीन हैं।
• कोई भी सजा प्राप्त अपराधी वर्तमान में नहीं है।
ऐसे में प्रश्न उठता है—
आखिर करुण डहरिया को किससे डर है?
उन्हें यह विशेष लाभ क्यों दिया जा रहा है?
यह स्थिति अपने आप में सरकार और जेल प्रशासन
पर सवाल खड़ा करती है।
यदि जेल की चारदीवारी के भीतर भी
कोई व्यक्ति स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा,तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है। यदि विवेचना में नए तथ्य सामने आते हैं, तो विधि अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। गिरफ्तारी, निलंबन और जेल स्थानांतरण के बाद यह मामला जिले में गंभीर प्रशासनिक प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है।



