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4.51 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता में सिर्फ तबादला, विभागीय कार्रवाई नहीं होने से उठे गंभीर सवाल जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद भी कार्रवाई का इंतजार, अब सवाल—मनीराम यादव पर आगे क्या होगा एक्शन?

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4.51 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितता में सिर्फ तबादला, निलंबन नहीं होने से उठे गंभीर सवाल

जांच रिपोर्ट में अनियमितताओं का उल्लेख, शासन को भेजी जा चुकी है रिपोर्ट; अब सवाल यह कि आगे क्या होगी कार्रवाई?

बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव का तबादला किए जाने के बाद जिले में एक बार फिर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला चर्चा में आ गया है। करीब 4.51करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े इस मामले में जांच पूरी होने और जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद भी फिलहाल मनीराम यादव के खिलाफ निलंबन अथवा किसी अन्य कठोर विभागीय कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। उन्हें केवल स्थानांतरित कर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा, विकासखंड अंबिकापुर, जिला सरगुजा में प्राचार्य के पद पर पदस्थ किया गया है।

इधर, करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में केवल तबादले की कार्रवाई होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब मामले में जांच कराई गई और जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताएं पाए जाने की बात सामने आई, तो कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए थी।

कई मदों में वित्तीय अनियमितता के आरोप

मनीराम यादव के कार्यकाल को लेकर विभिन्न वित्तीय मदों में कथित गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। शिकायतों में डीएफ मद, सफाई सामग्री, अध्ययन सामग्री, साइकिल वितरण, फर्नीचर खरीदी समेत अन्य कार्यों में वित्तीय नियमों की अनदेखी और राशि के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई गई। जांच टीम द्वारा अपनी रिपोर्ट तैयार की गई और रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताएं पाए जाने की बात सामने आने के बाद इसे आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि जांच रिपोर्ट शासन के पास पहुंच चुकी है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई कब और किस स्तर पर होगी?

कलेक्टर ने भी रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की पुष्टि की थी

इस मामले में बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने पूर्व में बताया था कि जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उसे आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेज दिया गया है।

इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से तबादला आदेश जारी किया गया। आदेश के अनुसार मनीराम यादव को बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से हटाकर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परसा, विकासखंड अंबिकापुर, जिला सरगुजा में प्राचार्य बनाया गया है।

वहीं, नरेन्द्र कुमार निरापुरे, प्राचार्य शासकीय हाई स्कूल कोराचा, विकासखंड मानपुर, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी को प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर-रामानुजगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

करोड़ों की राशि के मामले में तबादला ही क्यों?

तबादला आदेश सामने आने के बाद अब स्थानीय स्तर पर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि करीब 4.30 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सिर्फ स्थानांतरण क्यों किया गया?

आम लोगों और शिकायतकर्ताओं की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि जांच में वित्तीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई है, तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।

लोगों का यह भी कहना है कि महज तबादले को कार्रवाई मानना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि तबादले के बाद भी संबंधित अधिकारी को दूसरे स्थान पर प्राचार्य की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं की जवाबदेही को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

पहले भी शिकायतों को लेकर चर्चा में रहा नाम

मनीराम यादव के खिलाफ पूर्व में भी विभिन्न मामलों को लेकर शिकायतें और आरोप सामने आने की बात कही जाती रही है। ऐसे में वर्तमान मामले में जांच रिपोर्ट आने के बाद भी यदि कार्रवाई केवल स्थानांतरण तक सीमित रहती है, तो इससे विभागीय जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, किसी भी अधिकारी के खिलाफ आरोपों को अंतिम दोष साबित नहीं माना जा सकता। वास्तविक जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जाने वाली विभागीय जांच, दस्तावेजों की जांच और शासन के अंतिम निर्णय के आधार पर ही होगा।

क्या शासन करेगा आगे की कार्रवाई?

अब पूरा मामला शासन स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई पर टिका हुआ है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद विभाग की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

यदि जांच रिपोर्ट में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं दर्ज हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, राशि की वसूली, विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अथवा अन्य वैधानिक कदमों को लेकर शासन का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल तबादले के आदेश ने मामले को शांत करने के बजाय कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या करीब 4.51 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला केवल तबादले तक सीमित रहेगा? क्या जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कोई कठोर कार्रवाई होगी? और यदि वित्तीय अनियमितताओं के लिए किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसकी जवाबदेही किस स्तर तक निर्धारित की जाएगी?

इन सवालों के जवाब अब शासन की अगली कार्रवाई से ही सामने आएंगे।

प्रशासन और शासन की जवाबदेही पर भी नजर

करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामलों में आमतौर पर सिर्फ संबंधित अधिकारी की भूमिका ही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया की जांच भी महत्वपूर्ण होती है। खरीदी प्रक्रिया, स्वीकृति, भुगतान, सामग्री की वास्तविक आपूर्ति, उपयोगिता और संबंधित अभिलेखों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि अनियमितता किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

ऐसे में बलरामपुर के इस मामले में भी अब लोगों की नजर केवल तबादले पर नहीं, बल्कि जांच रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और उसके आधार पर शासन द्वारा लिए जाने वाले अंतिम निर्णय पर है।

फिलहाल मनीराम यादव का तबादला हो चुका है, लेकिन करीब 4.51करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े सवाल अभी भी कायम हैं। अब देखना यह है कि शासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी किस तरह तय की जाती है।

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