तातापानी महोत्सव में मंच नहीं मिलने से नाराज स्थानीय कलाकारों ने सौंपा राज्यपाल के नाम ज्ञापन

तातापानी महोत्सव में मंच से वंचित स्थानीय कलाकारों का विरोध, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
बलरामपुर। तातापानी महोत्सव, जो हर वर्ष अपने भव्य आयोजन के लिए प्रसिद्ध है, इस बार स्थानीय कलाकारों के विरोध और आक्रोश का केंद्र बन गया। 14 जनवरी से शुरू हुए तीन दिवसीय महोत्सव का समापन भोजपुरी अदाकारा अक्षरा सिंह की प्रस्तुति के साथ हुआ, लेकिन स्थानीय कलाकारों को मंच न मिलने पर उनकी नाराजगी साफ तौर पर देखने को मिली।
ज्ञापन में क्या कहा गया?
रामानुजगंज के कलाकारों ने एसडीएम के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि महोत्सव में जिला प्रशासन ने अपनी मनमानी करते हुए बाहरी कलाकारों को मंच दिया और क्षेत्रीय प्रतिभाओं को पूरी तरह अनदेखा किया। ज्ञापन में भोजपुरी अदाकारा अक्षरा सिंह को “अश्लील कलाकार” करार देते हुए उनकी प्रस्तुति को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया गया।
स्थानीय कलाकारों का पक्ष
स्थानीय कलाकार पवन पांडेय ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि तातापानी महोत्सव छत्तीसगढ़ के धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, लेकिन हर साल क्षेत्रीय कलाकारों को न केवल नजरअंदाज किया जाता है, बल्कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार भी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि महोत्सव में भ्रष्टाचार व्याप्त है और बाहरी कलाकारों को केवल इसलिए बुलाया जाता है ताकि प्रशासन की अनियमितताएं छिपाई जा सकें।
धार्मिक आस्था पर चोट का आरोप
कलाकारों ने महोत्सव में भोजपुरी कलाकारों को बुलाने को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इस प्रकार की प्रस्तुतियां धार्मिक स्थलों की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। पवन पांडेय ने यह भी कहा कि यह न केवल कलाकारों का अपमान है, बल्कि हिंदू समुदाय की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।
ज्ञापन सौंपने पहुंचे कलाकार
ज्ञापन देने पहुंचे कलाकारों में पवन पांडेय, चुलबुल पांडेय, विकास कुशवाहा, आनंद मिश्रा, अंजय कुमार, आकाश तिवारी, अविनाश कुमार मेहता और राजकुमार यादव शामिल थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में क्षेत्रीय कलाकारों को उचित मंच नहीं दिया गया, तो इसका व्यापक विरोध किया जाएगा।
स्थानीय संस्कृति को बचाने की मांग
कलाकारों ने महोत्सव के आयोजकों से मांग की कि तातापानी जैसे धार्मिक स्थल की पवित्रता को बनाए रखने के लिए क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने प्रशासन से महोत्सव में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की भी अपील की।
तातापानी महोत्सव, जो छत्तीसगढ़ की संस्कृति और धार्मिक धरोहर को प्रस्तुत करने का मंच है, अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय कलाकारों की अनदेखी और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप आयोजकों के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। आने वाले वर्षों में प्रशासन के कदम इस दिशा में सुधार लाने वाले होंगे या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।



