
बलरामपुर (छत्तीसगढ़) – 12 मई 2025 की रात बलरामपुर जिले में जो कुछ हुआ, उसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। एक ईमानदार आरक्षक, शिवबचन सिंह, अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान शहीद हो गया। यह कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं थी—यह एक संगठित रेत माफिया का खौफनाक चेहरा था, जिसकी जड़ें झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश तक फैली हुई थीं।

इस हत्या ने प्रदेश भर में हड़कंप मचा दिया। जनाक्रोश बढ़ने लगा। सोशल मीडिया से लेकर विधानसभा तक इस मुद्दे ने जोर पकड़ा। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और राज्य प्रशासन से जवाब तलब किया।

हत्या की रात: घटनाक्रम की पूरी कहानी
12 मई की रात बलरामपुर के लिबरा घाट से अवैध रेत खनन की सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर छापा मारा। टीम ने देखा कि तीन ट्रैक्टरों पर रेत लोड की जा रही थी। ट्रैक्टर चला रहे थे आरिफुल हक, उपेंद्र कोरवा और मुख्य आरोपी हमीदुल हक—जो इस रैकेट का सक्रिय हिस्सा था।
जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, आरोपित भागने लगे। आरक्षक शिवबचन सिंह ने साहस दिखाते हुए हमीदुल की ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान हमीदुल ने उसे ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी और फरार हो गया। इतना ही नहीं, उसने बाकी टीम पर भी ट्रैक्टर से हमला करने की कोशिश की। जवानों ने किसी तरह जान बचाई।

मास्टरमाइंड नसीमुल हक: कैसे खड़ा हुआ रेत का साम्राज्य
बलरामपुर के एसपी वैभव बेंकर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि जांच के दौरान पता चला कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है – नसीमुल हक उर्फ नसीम, जो झारखंड के गढ़वा जिले के धुरकी थाना अंतर्गत खाला टोला का निवासी है। उसके नौ बेटे हैं, जो रेत तस्करी में उसका साथ देते थे।
नसीम ने रेत के अवैध धंधे से अकूत संपत्ति बनाई थी। उसने दो ट्रैक्टर, दो हाइवा और एक जेसीबी खरीद रखी थी जो केवल कन्हर नदी से अवैध रेत निकालने के लिए इस्तेमाल होती थी। यह नदी झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमा पर है—यह भौगोलिक स्थिति नसीम के लिए वरदान थी, जिसे वह सीमा पार होने के बहाने कानून से बचने के लिए इस्तेमाल करता था।
रेत को नसीम परसापानी (गढ़वा) में डंप करता और फिर वहां से उसे ट्रकों के जरिए झारखंड और यूपी के जिलों में बेचता। यह एक सुव्यवस्थित सिंडिकेट था, जिसमें दर्जनों लोग जुड़े थे। उसने अपने बेटों को साफ कहा था—“अगर कोई पुलिस वाला रास्ता रोके, तो उसे खत्म कर दो।”
सात थानों की टीमें, दो राज्यों में छापेमारी, 8 गिरफ्तार
जैसे ही घटना हुई, बलरामपुर पुलिस तत्काल सक्रिय हुई। एसपी वैभव बेंकर ने सात थानों की विशेष टीमें बनाई। इन टीमों ने झारखंड और उत्तरप्रदेश में लगातार छापेमारी की। कई संदिग्धों को पकड़ा गया, पूछताछ की गई, और अंततः इस हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
गिरफ्तार आरोपित:

1. नसीमुल हक उर्फ नसीम (65 वर्ष) – मास्टरमाइंड
2. हमीदुल हक उर्फ हमीद (20 वर्ष) – आरक्षक की हत्या का मुख्य आरोपी
3. निजामुल हक उर्फ निजाम (26 वर्ष)
4. आरिफुल हक (24 वर्ष)
5. जमील अंसारी (41 वर्ष)
6. उपेन्द्र कोरवा (25 वर्ष)
7. शकील अंसारी (22 वर्ष)
8. अकबर अंसार (50 वर्ष)
इनके पास से तीन ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं जो घटना में इस्तेमाल हुए थे। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
जांच जारी, और भी गिरफ्तारियां होंगी
एसपी बेंकर ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है। रेत माफिया से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। जिन पर भी सबूत मिलेंगे, उन पर सख्त कार्रवाई होगी। इस हत्याकांड में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कौन-कौन रहे इस कार्रवाई में शामिल?
इस व्यापक अभियान में कई पुलिसकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई:
निरीक्षक अजय साहू, कुमार चंदन सिंह, व्यास नारायण चुरेन्द्र, उप निरीक्षक हिम्मत सिंह शेखावत, धिरेन्द्र तिवारी, मनोज नवरंगे, गजपति मिर्रे, नवल किशोर दुबे, स०उ०नि० अश्वनी सिंह, राधेश्याम विश्वकर्मा, गोटिया राम मरावी, शिव कुमार सिंह, पंचम राम भगत प्र०आर० मायापति सिह, नारायण तिवारी, विजय टोप्पों, अमर टोप्पों, विक्रम एक्का एवं साइबर टीम प्र०आर० नागेन्द्र पाण्डेय, राहुल यादव, आर० राजकमल सैनी, मंगल सिंह, सुखलाल, पंकज शर्मा, राजकिशोर, आकाश तिवारी, प्रशांत भगत आदि शामिल हैं
इनकी सूझबूझ और हिम्मत से यह गिरोह बेनकाब हो सका।
इस घटना ने क्या बताया?
यह घटना कई गहरे सवाल खड़े करती है:
क्या सीमावर्ती इलाकों में कानून का कोई भय नहीं बचा है?
क्या रेत माफिया अब इतने ताकतवर हो चुके हैं कि वे पुलिस तक को मारने की हिम्मत रखते हैं?
क्या अवैध खनन के खिलाफ राज्य सरकार को अब और कड़े कदम नहीं उठाने चाहिए?
आरक्षक शिवबचन सिंह की शहादत हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब तक व्यवस्था सख्त नहीं होगी, तब तक ऐसे माफिया बेखौफ रहेंगे।



