
भवरमाल में नाली निर्माण में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला, ग्रामवासी भड़के – जनपद सीईओ को सौंपा ज्ञापन
रामचंद्रपुर, बलरामपुर— विकासखंड रामचंद्रपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत भवरमाल में नाली निर्माण को लेकर भारी भ्रष्टाचार का आरोप सामने आया है। ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2022-23 में भारत सरकार की विशेष केंद्रीय सहायता मद से स्वीकृत नाली निर्माण कार्य को गलत स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और ग्रामीणों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है।

स्वीकृत स्थल पर नहीं हो रहा निर्माण
ग्राम पंचायत द्वारा पहले प्रस्तावित और शासन द्वारा स्वीकृत स्थल खसरा क्रमांक 465, जो कि बीचपारा क्षेत्र में स्थित है तथा वहां पर घनी आबादी निवास करती है, उस स्थान को छोड़कर लगभग 1.5 किलोमीटर दूर दक्षिणपारा नामक निर्जन क्षेत्र में नाली का निर्माण कराया जा रहा है। आश्चर्यजनक बात यह है कि दक्षिणपारा में न तो कोई बस्ती है और न ही जल निकासी की कोई जरूरत, फिर भी 20 लाख रुपये की लागत से वहीं निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

ग्रामवासियों का फूटा आक्रोश
जैसे ही निर्माण कार्य शुरू हुआ, ग्रामीणों को असलियत का पता चला। इसके बाद ग्रामवासी एकजुट होकर कार्य के खिलाफ लामबंद हो गए। उनका कहना है कि वास्तविक स्थल पर नाली निर्माण से जनता को सीधा लाभ मिलता, लेकिन विभागीय अधिकारियों और कुछ पंचायत कर्मियों की मिलीभगत से कार्य को ऐसी जगह स्थानांतरित कर दिया गया जहां निर्माण की आवश्यकता ही नहीं है।
ग्रामवासियों का यह भी आरोप है कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में यदि घटिया निर्माण किया जाता तो तुरंत पकड़ में आ जाता, इसलिए जानबूझकर कार्य को दूरस्थ और निर्जन इलाके में शिफ्ट कर दिया गया, ताकि सरकारी पैसे का बंदरबांट आसानी से किया जा सके।

सचिव का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
जब इस मुद्दे को लेकर सचिव सतनारायण सिंह से बात की गई, तो उन्होंने चौंकाने वाला उत्तर दिया। उनका कहना था: “वाह सचिव साहब बिना पता ही आप नाली निर्माण करवा रहे हैं”
“मुझे नहीं पता कि नाली कहां से कहां तक बनानी है। यह भी नहीं मालूम कि 20 लाख रुपये में कितनी दूरी तक काम होना है। मुझे जैसा बताया गया, मैंने वैसा ही काम शुरू कराया।”और उन्होंने बताया कि इसका लेआउट कहां से कहां तक है यह भी पता नहीं और किसने ले आउट किया यह भी मुझे पता नहीं है

इस बयान ने ग्रामवासियों की चिंताओं को और पुख्ता कर दिया है। जब स्वयं सचिव को नाली निर्माण की सीमा और स्थल का ज्ञान नहीं है, तो यह संदेह स्वाभाविक है कि भ्रष्टाचार की योजना पहले से ही तैयार की गई थी।

ग्रामवासियों की प्रमुख मांगें:
1. निर्माण स्थल की जांच – खसरा क्रमांक 465 पर स्वीकृति के अनुसार ही नाली का निर्माण किया जाए।
2. वास्तविक निर्माण स्थल की पुष्टि के लिए राजस्व विभाग से स्थल निरीक्षण कराया जाए।
3. भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की जाए।
4. वर्तमान निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, जब तक जांच पूरी न हो जाए।
5. पारदर्शी कार्य प्रणाली सुनिश्चित करने हेतु ग्रामसभा की अनुमति से ही आगे कोई निर्माण कार्य हो।





