
सेमरवा: 100 एकड़ वनभूमि अतिक्रमण से मुक्त, बलरामपुर वन मंडल की बड़ी कार्यवाही
बलरामपुर, छत्तीसगढ़: बलरामपुर वन मंडल के अंतर्गत एक बड़ी कार्यवाही में भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 80(A) के तहत सेमरवा ग्राम की 100 एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। यह कार्रवाई वन मंडलाधिकारी आलोक कुमार बाजपेयी के निर्देशन में की गई, जिसमें प्रशासन, पुलिस, राजस्व और वन विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही।
वन भूमि पर अवैध कब्जा हटाया गया
ग्राम सेमरवा के सुधु पिता डबल, राजकुमार पिता लल्लु, गुठल आ. लक्षन, शनिचर आ. बालमुकुन्द, रामऔतार आ. पाडु, नान्हु आ. पाडु, बुधन आ. चितामन एवं निर्माणाधीन मकान गुलाबचन्द पण्डो द्वारा वन क्षेत्र कक्ष क्रमांक पी 923 में रकबा 100 एकड़ क्षेत्र में अतिक्रमण कर मकान निर्माण किया जा रहा था। इन सभी को बेदखली आदेश के तहत वन भूमि से हटाया गया।

अन्य अतिक्रमणकारियों को नोटिस
इसके अतिरिक्त, ग्राम सेमरवा के ही सुदामा पिता केश्वर प्रसाद यादव, राजमोहन पिता लक्ष्मण पण्डो, ईश्वर पिता राजमोहन पण्डो और बलराम पिता राजदेव पण्डो को वनभूमि पर अतिक्रमण के मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। इन व्यक्तियों के विरुद्ध आगामी दिनों में बेदखली की कार्यवाही प्रस्तावित है।
प्रशासनिक अमला रहा उपस्थित
इस कार्यवाही में उप वन मंडलाधिकारी बलरामपुर, प्रशिक्षु एसीएफ, धमनी वन परिक्षेत्राधिकारी, वाड्रफनगर एवं धमनी परिक्षेत्रों के अधिकारी, थाना प्रभारी सनावल एवं उनके पुलिस बल, तहसीलदार रामचन्द्रपुर, राजस्व विभाग का अमला तथा वन विभाग के सैकड़ों कर्मचारी शामिल थे। साथ ही ग्राम पंचायत कुशफर के सरपंच एवं पंचगण भी मौके पर उपस्थित रहे। सभी की निगरानी में अतिक्रमण हटाया गया और वनभूमि को संरक्षित किया गया।

वनमंडलाधिकारी का सख्त संदेश
वनमंडलाधिकारी श्री आलोक कुमार बाजपेयी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वनभूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने वन कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि अन्य अतिक्रमण स्थलों की पहचान कर लगातार बेदखली की कार्यवाही की जाएगी।
ग्रामीणों से अपील
वन विभाग द्वारा ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे वनभूमि पर अतिक्रमण करने से परहेज करें। वन क्षेत्र न केवल प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
यह कार्यवाही बलरामपुर जिले में वन भूमि की रक्षा और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध एक सशक्त संदेश है। प्रशासनिक सख्ती और विभागीय समन्वय के चलते 100 एकड़ भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।





