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बलरामपुर की बदहाल सड़कों ने फिर ली एक जान: लघु वनोपज समिति के प्रबंधक अजय सिंह की दर्दनाक मौत

बलरामपुर, छत्तीसगढ़ | 31 जुलाई 2025
बलरामपुर जिले की जर्जर और खतरनाक सड़कों पर एक और ज़िंदगी असमय खत्म हो गई। लापरवाही, उपेक्षा और घटिया सड़कों के चलते महावीरगंज निवासी अजय सिंह, जो कि लघु वनोपज समिति के प्रबंधक थे, अब इस दुनिया में नहीं रहे।

हादसा कैसे हुआ?

28 जुलाई 2025 को अजय सिंह अपने गृहग्राम से रामानुजगंज लौट रहे थे। जैसे ही वह विजयनगर चौक के पास पहुंचे — जो रामानुजगंज-वाड्राफनगर स्टेट हाईवे पर स्थित है — वहाँ सड़क के बीचोंबीच गड्ढों ने उनकी बाइक को असंतुलित कर दिया।
तेज़ रफ्तार में नहीं थे, लापरवाह भी नहीं थे — बस सड़कों की हालत ही ऐसी थी कि किसी की भी जान ले सकती है।
महावीरगंज चौक के पास उनका वाहन फिसल गया और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। तत्काल उन्हें अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया, जहाँ वे जीवन और मौत के बीच तीन दिन तक जूझते रहे।


अस्पताल में आखिरी सांस

30 जुलाई की रात करीब 12 बजे, डॉक्टरों ने अजय सिंह को मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से महावीरगंज और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने रोष और गुस्से के साथ यह सवाल उठाया कि आखिर कब तक सड़कें यूं ही जानलेवा बनी रहेंगी।



कौन थे अजय सिंह?

अजय सिंह न सिर्फ महावीरगंज लघु वनोपज समिति के प्रबंधक थे, बल्कि एक ईमानदार, मेहनती और कर्तव्यनिष्ठ व्यक्ति भी थे। वे ग्रामीण विकास, रोजगार और वन समितियों के सशक्तिकरण में सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। उनका व्यवहार हर वर्ग के लोगों के साथ सौहार्दपूर्ण था। उनकी मौत से न केवल एक परिवार उजड़ गया, बल्कि समाज ने एक जिम्मेदार सेवक खो दिया।

प्रशासन और विभाग की लापरवाही

रामानुजगंज-वाड्राफनगर मार्ग की हालत कोई नई समस्या नहीं है। विजयनगर चौक, महावीरगंज चौक और कई अन्य मोड़ वर्षों से ‘ब्लैक स्पॉट’ बने हुए हैं, जहां आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। ग्रामीणों ने कई बार जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग (PWD) को लिखित रूप से अवगत कराया, लेकिन सिर्फ कागजों पर आश्वासन दिए गए — जमीनी कार्रवाई शून्य रही।

आज भी सड़क में वही गड्ढे हैं। वही खतरा बरकरार है। और अब एक और जान जा चुकी है।

सवाल जो अब जवाब मांगते हैं

सड़क की मरम्मत क्यों नहीं हुई, जब पहले से शिकायतें मौजूद थीं?

क्या अजय सिंह की मौत के बाद विभाग चेतेगा या अगली जान के इंतजार में रहेगा?

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