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युक्तियुक्तकरण के विरोध में बलरामपुर ज़िले में कांग्रेस का ज़ोरदार प्रदर्शन

ANAND MISHRA OFFICIAL PRESENTS

युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ बलरामपुर जिले में कांग्रेस का हल्ला बोल: BEO कार्यालयों का घेराव, हजारों शिक्षकों की नौकरी पर संकट

बलरामपुर (छ.ग.) — प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही ‘युक्तियुक्तकरण’ नीति के विरोध में आज बलरामपुर जिले के चारों ब्लॉकों — रामानुजगंज, राजपुर, वाड्राफनगर और बलरामपुर में ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित किया गया, जिसमें कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिक्षा विभाग के BEO (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) कार्यालयों का घेराव कर नारेबाज़ी की और सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार दिया।



क्या है युक्तियुक्तकरण और क्यों है विरोध?

युक्तियुक्तकरण नीति के तहत प्रदेश सरकार स्कूलों के पुनर्गठन का दावा कर रही है। लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि इस नीति के पीछे सरकार की मंशा शिक्षकों की संख्या में भारी कटौती कर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की है।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि इस नीति के लागू होने से:

प्रदेश में लगभग 45,000 शिक्षकों के पद समाप्त हो जाएंगे।

10463 स्कूलों को पहले ही बंद किया जा चुका है।

नए सेटअप के नाम पर न्यूनतम शिक्षक संख्या तय कर दी गई है, जिससे हजारों पद स्वतः समाप्त हो रहे हैं।


शिक्षा और रोजगार दोनों पर हमला

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि युक्तियुक्तकरण सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर हमला नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित रोजगार विरोधी कदम है। स्कूलों में कार्यरत रसोइया, भृत्य, सफाईकर्मी, महिला समूहों और स्थानीय युवाओं की आजीविका भी इस नीति से प्रभावित हो रही है।

“जब एक स्कूल में सिर्फ दो शिक्षक होंगे, तो वे 18 कक्षाओं को कैसे पढ़ा पाएंगे?” — कांग्रेस ने सवाल उठाया।
उन्होंने यह भी कहा कि उन शिक्षकों को पढ़ाने के साथ-साथ मध्यान्ह भोजन, सरकारी पत्राचार, और अन्य गैर-शैक्षणिक कामों की भी जिम्मेदारी दी जा रही है, जिससे शिक्षकों का कार्यभार असंभव हद तक बढ़ जाएगा।

आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष प्रभाव

कांग्रेस ने विशेष रूप से इस बात को उठाया कि सरगुजा और बस्तर जैसे अनुसूचित क्षेत्रों में इस नीति का सबसे ज्यादा असर होगा। वहां के गरीब और आदिवासी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पहले ही सीमित संसाधनों में चल रही है, अब स्कूलों की संख्या कम होने से शिक्षा का स्तर और गिर जाएगा।

कांग्रेस की मांग और चेतावनी

ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों ने प्रदर्शन के माध्यम से राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है:

युक्तियुक्तकरण नीति को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

बंद किए गए स्कूलों को पुनः खोला जाए।

शिक्षकों की संख्या में कटौती की जगह रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाए।

ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए, न कि उसमें कटौती।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि यह नीति वापस नहीं ली गई, तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज़ होगा। जिला मुख्यालयों से लेकर राजधानी तक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

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