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सामुदायिक भूमि पर भूमाफिया की नज़र, पंचायत की जमीन पर कब्जे का आरोप

ग्राम पंचायत देवगई की सामुदायिक वन भूमि अचानक निजी नाम पर दर्ज, हजारों ग्रामीणों का विरोध; वन विभाग ने जांच का आश्वासन दिया, पट्टे में नक्शा भी दर्ज


ग्राम पंचायत की सामुदायिक भूमि पर कब्जे का आरोप, हजारों ग्रामीणों में आक्रोश


बलरामपुर। जनपद पंचायत रामचंद्रपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत देवगई (चंदनपुर) के चलगली मोड़ स्थित सामुदायिक भूमि पर कब्जे का मामला गरमा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन द्वारा सामुदायिक प्रयोग के लिए दी गई यह भूमि अचानक राजस्व अभिलेखों में एक निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज हो गई है। इस मुद्दे को लेकर गांव के हजारों महिला-पुरुष ग्रामीणों ने बड़ी बैठक कर रणनीति बनाई।



  सामुदायिक उपयोग के लिए मिली थी जमीन


ग्रामीणों ने बताया कि शासन से ग्राम पंचायत को यह भूखंड सामुदायिक वन अधिकार पट्टा के अंतर्गत आवंटित हुआ था। पंचायत ने इस स्थान पर साप्ताहिक बाजार लगाने की व्यवस्था की थी, जिससे व्यापार और खरीदी-बिक्री में सुविधा होती थी। भविष्य में यहां सामुदायिक भवन का निर्माण कर ग्राम समाज के हित में उपयोग करने की योजना भी थी।



             वन प्रबंधन समिति का आरोप


वन प्रबंधन समिति अध्यक्ष अरविंद प्रजापति ने कहा, “शासन द्वारा ग्राम पंचायत की मांग पर सामुदायिक कामों के लिए सामुदायिक वन भूमि पट्टा दिया गया था। इसमें समाज के हित में सामुदायिक भवन, बाजार और अन्य सामुदायिक प्रयोग के लिए भूमि दी गई थी। लेकिन अब यह जमीन कुछ दिनों से भू-राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज दिख रही है, जिससे साफ है कि भूमाफिया के चंगुल में सामुदायिक भूमि को राजस्व भूमि में बदल दिया गया है। इस भूमि को माफिया से मुक्त कराकर समाज के हित में पुनः प्रयोग योग्य बनाया जाएगा।”



                    वन विभाग का बयान


तत्कालीन रेंजर और वर्तमान में बलरामपुर के एसडीओ संतोष पांडे ने इस मामले में कहा, “यह भूमि वन विभाग के रिकॉर्ड में वन भूमि के रूप में दर्ज है। ग्रामीणों ने शिकायत की है, जिसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस भूमि का अधिकार पट्टा पंचायत को दिया गया है, जिसमें नक्शा भी संलग्न है।”

                 ग्रामीणों का शक और चेतावनी


गांव के लोगों को संदेह है कि इस पूरे मामले में भूमाफिया और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत है, क्योंकि बिना विभागीय हस्तक्षेप के रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर इस भूमि को शीघ्र पंचायत के नाम पर वापस दर्ज नहीं किया गया और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे और जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन करेंगे।

                             जांच की मांग


ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सामुदायिक संपत्ति पर कब्जे के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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