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सच लिखने की सज़ा: तीन बार जानलेवा हमला असफल“तहसीलदार और जमीन दलालों पर हत्या की सुपारी देने का आरोप”

भ्रष्टाचार उजागर करने वाले संपादक की हत्या की साजिश बेनकाब

सूरजपुर में निष्पक्ष पत्रकारिता पर हमला • तीन बार जान से मारने की कोशिश नाकाम • पंचायत में आरोपी ने किया कबूलनामा

सूरजपुर (छत्तीसगढ़)।
“जाको राखे साइयां मार सके न कोय”—यह कहावत छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में सच साबित होती दिख रही है। यहाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार खबरें लिखने वाले सिंधु स्वाभिमान और हिंद स्वराष्ट्र अखबार के संपादक प्रशांत पांडे पर तीन बार मौत का शिकंजा कसने की कोशिश हुई, मगर हर बार साजिश असफल रही। आरोप है कि तहसीलदार और जमीन दलालों ने पत्रकार को चुप कराने के लिए हत्या की सुपारी तक दी। पंचायत में हुई कार्यवाही में खुद आरोपी ने साजिश कबूल की है।


कैसे चढ़ी कलम पर खंजर?

संपादक प्रशांत पांडे और उनकी पत्नी ने लंबे समय से सूरजपुर जिले में भ्रष्टाचार की पोल खोलने वाली खबरें प्रकाशित कीं।

  • पहली खबर: लटोरी तहसील के तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा द्वारा बिना अनुमति और फर्जी तरीके से जमीन रजिस्ट्री कराने का मामला। इस पर एसडीएम शिवानी जायसवाल ने तहसीलदार को कारण बताओ नोटिस दिया।
  • दूसरी खबर: सिरसी ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना और नामांतरण से जुड़ा भ्रष्टाचार। इस रिपोर्ट के बाद रोजगार सहायक नईम अंसारी को बर्खास्त किया गया, और कई मामले जांचाधीन हैं।

इन्हीं रिपोर्टों से नाराज अधिकारी और उनके करीबी दलालों ने संपादक को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।


मौत की तीन कोशिशें – पर नाकाम

  1. पीछा करने की कोशिश: दो बोलेरो और एक स्कॉर्पियो से संपादक और परिवार का पीछा किया गया। बच्चे साथ होने से हमला टालना पड़ा।
  2. शूटर बुलाए गए: आरोप है कि शूटर असलम और फिरोज अंसारी को काम पर लगाया गया। लेकिन उस वक्त पांडे परिवार उज्जैन चला गया, योजना विफल रही।
  3. सड़क हादसे की साजिश: 20 सितंबर की रात बाइक से लौटते वक्त भीड़ का फायदा उठाकर संपादक को कुचलने की कोशिश हुई। लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के कारण हमला नाकाम रहा।

पंचायत में सच का धमाका

हरिपुर पंचायत सभा में पूरा मामला उजागर हुआ। आरोपी संजय गुप्ता ने पंचायत के सामने स्वीकार किया कि संपादक की हत्या के लिए सुपारी दी गई थी। उसने माफी भी मांगी। वहीं हरिओम गुप्ता ने आरोपों से इनकार किया और पंचायत से बाहर मामले को “सुलझाने” की बात कही। इस स्वीकारोक्ति ने पूरे जिले में हड़कंप मचा दिया।


भय के साये में पत्रकार परिवार

लगातार धमकियों और तीन बार जानलेवा हमले से संपादक प्रशांत पांडे और उनका परिवार डरे हुए हैं। उन्होंने ठोस सबूतों के साथ आईजी सरगुजा रेंज को आवेदन सौंपा है।
उनकी मांगें:

  • तुरंत पुलिस सुरक्षा दी जाए।
  • हत्या की साजिश में शामिल सभी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  • पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था बने।

निष्पक्ष पत्रकारिता पर सवालिया निशान

यह मामला केवल एक संपादक की सुरक्षा का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आज़ादी पर सीधा हमला है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखना आज मौत को न्योता देने जैसा बन गया है। अगर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो कलम की ताकत को दबाने की ऐसी कोशिशें आम हो जाएंगी।

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