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रस्सियों से बंधा प्यार: प्रेमी को उतारे कपड़े, बरसाईं लाठियां

छत्तीसगढ़ में ऑनर के नाम पर हिंसा: प्रेमी को बांधकर पीटा, प्रेमिका पर भी हमला

बलरामपुर का वायरल वीडियो: इश्क़ की सज़ा बनी बर्बर मारपीट


बलरामपुर (छत्तीसगढ़):
चलगली थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक शर्मनाक घटना सामने आई। पंचायत सरपंच के परिवार ने अपनी भतीजी से मिलने आए युवक को रंगे हाथों पकड़कर बंधक बना लिया और फिर बेरहमी से पीटा। रस्सी से हाथ बांधकर कपड़े उतरवाए गए और लाठी-डंडों से हमला किया गया। इतना ही नहीं, जब युवती अपने प्रेमी को बचाने पहुंची, तो उस पर भी हमला कर दिया गया। पूरी घटना का वीडियो वायरल हो गया है।




                       कैसे हुआ विवाद?

जानकारी के मुताबिक, युवक और युवती एक-दूसरे से प्रेम करते थे। युवती सरपंच की भतीजी है और युवक पास के ही गांव का रहने वाला है। शनिवार रात युवक अपनी प्रेमिका से मिलने आया तो घरवालों को इसकी भनक लग गई। इसके बाद सरपंच और उसके परिजनों ने युवक को पकड़कर पहले रस्सी से बांधा, फिर शर्ट उतरवाकर पीटना शुरू कर दिया।



वीडियो में साफ दिख रहा है कि युवक दर्द से कराहते हुए रहम की भीख मांग रहा है और युवती बार-बार “मत मारिए” कह रही है। लेकिन हिंसा थमी नहीं।

            घायल प्रेमी अस्पताल में भर्ती

लाठी-डंडों से हुई पिटाई में युवक बुरी तरह घायल हो गया। उसके शरीर पर कई जगह गहरे निशान हैं। फिलहाल उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत अब खतरे से बाहर है।

                   पुलिस की कार्रवाई

वीडियो वायरल होने के बाद बलरामपुर पुलिस हरकत में आई। चलगली थाना प्रभारी बृजलाल सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में ले लिया गया है और पीड़ित युवक को FIR दर्ज कराने बुलाया गया है। शिकायत मिलने के बाद आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



               सिर्फ प्रेम संबंध की सज़ा?

यह घटना सिर्फ एक युवक की पिटाई नहीं, बल्कि सवाल है उस मानसिकता पर, जहां प्रेम संबंध को “परिवार की इज़्ज़त” के खिलाफ माना जाता है। ऑनर और परंपरा के नाम पर ग्रामीण इलाकों में अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं, जहां प्रेमी-प्रेमिका को सज़ा दी जाती है।

भारत के कई हिस्सों में “ऑनर क्राइम” की जड़ें गहरी हैं। समाज, परिवार और सत्ता से जुड़े लोग अक्सर प्रेम संबंधों को अपने नियंत्रण के लिए खतरा मानते हैं। यही सोच हिंसा में बदल जाती है।



                   कानूनी नज़रिए से

किसी को बांधकर पीटना गंभीर अपराध है।

भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत यह हत्या के प्रयास, गंभीर चोट पहुँचाना, और बंधक बनाना जैसे अपराधों में आता है।

पुलिस की ज़िम्मेदारी है कि वीडियो और गवाहों के आधार पर तत्काल गिरफ्तारी करे।

                        बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ बलरामपुर का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए आईना है।

क्या व्यक्तिगत रिश्तों में दखल देकर हिंसा करना “इज़्ज़त” कहलाता है?

क्या पंचायत और परिवार का दबदबा युवाओं की स्वतंत्रता से बड़ा है?

और क्या पुलिस ऐसे मामलों में दबंग परिवारों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई कर पाएगी?

जब तक समाज और प्रशासन मिलकर इस मानसिकता को नहीं बदलते, तब तक ऐसे ऑनर-क्राइम रुकने वाले नहीं हैं।

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