DEO मनीराम यादव ने जॉइनिंग के बाद भी नहीं दिखाई उपस्थिति — क्या बलरामपुर शिफ्ट की तयशुदा चाल चल रहे है DEO?

रामानुजगंज से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय हटाने की तैयारी! शहर में उबाल, जनता में गहरा आक्रोश
रामानुजगंज (बलरामपुर-रामानुजगंज)।
शैक्षणिक जिला रामानुजगंज से जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय को हटाने की गुप्त तैयारी की खबर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कार्यालय को चुपचाप बलरामपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नए जिला शिक्षा अधिकारी ने नहीं दिखाई रुचि — एक दिन भी नहीं पहुंचे रामानुजगंज
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, नवनियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने 1 अक्टूबर 2025 को बलरामपुर में पदभार ग्रहण किया, लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्होंने एक दिन के लिए भी जिला शिक्षा कार्यालय रामानुजगंज में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है।
उनका रामानुजगंज न आना स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि कार्यालय को बलरामपुर स्थानांतरित करने की सोच और योजना पहले से तय थी।


कर्मचारियों को मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने शासकीय अभिलेख, कंप्यूटर और आवश्यक उपकरणों को बलरामपुर भेजने की तैयारी करें। यह प्रक्रिया गुप्त रूप से की जा रही है ताकि जनता और मीडिया को भनक न लगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1976 से रामानुजगंज में संचालित हो रहा है कार्यालय
रामानुजगंज का शैक्षणिक जिला वर्ष 1976 में तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्थापित किया गया था। तब से लेकर अब तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का मुख्यालय रामानुजगंज में ही रहा है।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद भी यह व्यवस्था जस की तस बनी रही।

यहां तक कि माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर और बाद में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने भी अपने आदेशों में इस स्थान को “सर्वथा उपयुक्त” माना था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रामानुजगंज से ही संचालित होगा।
जनता का रोष: “यह निर्णय जनविरोधी और मनमाना है”
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने कार्यालय को बलरामपुर स्थानांतरित करने की कोशिश को “जनविरोधी कदम” बताया है।
जनता का कहना है कि कुछ अधिकारी अपनी सुविधा और निजी हितों के लिए यह प्रयास कर रहे हैं, जबकि इससे हजारों छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों को भारी परेशानी होगी।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि कार्यालय बलरामपुर चला गया, तो प्रमाणपत्र सत्यापन, नियुक्ति प्रक्रियाएं और छात्रवृत्ति जैसे कार्यों के लिए लोगों को कई किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ेगा, जो न तो व्यावहारिक है और न ही जनहित में।
2018 में भी हुआ था आंदोलन — जनता की एकजुटता से बचा था कार्यालय
सन् 2018 में भी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को हटाने की कोशिश की गई थी। उस समय स्थानीय नागरिकों, शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर वृहद आंदोलन किया था।
तत्कालीन एसडीएम विजय दयाराम (जो बाद में कलेक्टर बने) की उपस्थिति में बैठक के बाद, उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से कार्यालय को यथास्थान रामानुजगंज में ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया था।

अधिकारी पहले से बलरामपुर से चला रहे काम
सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारी पहले से ही बलरामपुर से कार्य संचालन करने लगे हैं। इनमें

सहायकसंचालक(शिक्षा) ओमप्रकाश पाण्डेय सहायक ग्रेड 2
सुनील जायसवाल (MIS प्रशासक)। और सहायक संचालक (योजना)। जैसे दर्जन पर अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

कर्मचारियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यह कदम माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है और यदि इसे नहीं रोका गया तो यह “अमानना” की श्रेणी में आएगा।
छात्रों पर बढ़ा बोझ
अब छात्रों को काउंटर साइन और अन्य शैक्षणिक कार्यों के लिए भी बलरामपुर जाना पड़ रहा है।
यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों के छात्रों के लिए कठिनाई का कारण बन रही है।
शिक्षक संगठनों ने इसे “शिक्षा व्यवस्था पर कुठाराघात” बताया है।

संभावित आंदोलन की चेतावनी
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कार्यालय को हटाने की कोशिश जारी रही, तो जनता फिर से सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।
लोगों का कहना है कि “नए कार्यालय खुल नहीं रहे, पुराने बंद किए जा रहे हैं,” जिससे जनता में सरकार के प्रति अविश्वास और असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।
जनता बनाम प्रशासन की टकराहट तय
परिस्थितियां अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी हैं।
यदि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को बलरामपुर में स्थानांतरित किया गया, तो यह कदम न केवल प्रशासनिक असंतुलन पैदा करेगा, बल्कि यह राजनीतिक और जनसंघर्ष का बड़ा कारण बन सकता है।
जनता का सवाल सीधा है —
“जब उच्च न्यायालय ने स्पष्ट आदेश दिए हैं, तो आखिर किस दबाव में हटाई जा रही है शिक्षा की जड़ रामानुजगंज से?”






