बलरामपुर में धान माफिया बेखौफ, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर प्रशासन को दी खुली चुनौती

बलरामपुर में धान माफिया बेखौफ, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल कर प्रशासन को दी खुली चुनौती
बलरामपुर जिले में धान माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे जिला प्रशासन और राजस्व विभाग को खुलेआम चुनौती देते नजर आ रहे हैं। अंतरराज्यीय सीमाओं से ट्रैक्टर के माध्यम से अवैध रूप से धान छत्तीसगढ़ लाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से 3100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने के बाद राज्य सरकार ने बाहरी राज्यों से अवैध रूप से लाए जा रहे धान पर सख्ती बढ़ा दी थी। बलरामपुर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग की टीमों ने लगातार कार्रवाई करते हुए अब तक करोड़ों रुपये मूल्य के अवैध धान और दर्जनों वाहनों को जब्त किया है। इसके बावजूद धान माफियाओं की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ट्रैक्टर में भरा धान नदी के रास्ते एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो ग्राम kundru क्षेत्र के पांगन नदी का है, जहां से अंतरराज्यीय सीमा लगती है। हालांकि, खबर इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं करती है, लेकिन वीडियो के सामने आने के बाद प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि धान माफियाओं ने खुद इस अवैध गतिविधि का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है। यह साफ दर्शाता है कि उन्हें न तो कानून का डर है और न ही प्रशासन की कार्रवाई का। माफियाओं का यह दुस्साहस कहीं न कहीं मजबूत संरक्षण की ओर इशारा करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धान खरीदी शुरू होते ही सीमावर्ती इलाकों में अवैध परिवहन तेज हो गया है। रात के अंधेरे में ट्रैक्टर, पिकअप और अन्य वाहनों से नदी, कच्चे रास्तों और खेतों के रास्ते धान लाया जा रहा है। कई बार इसकी शिकायतें भी प्रशासन तक पहुंची हैं, लेकिन माफियाओं के हौसले कम नहीं हुए।
यह पूरा मामला अब जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह भी है कि जब करोड़ों की कार्रवाई के बाद भी धान माफिया बेखौफ हैं, तो आखिर उन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है। क्या कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित है, या फिर जमीनी स्तर पर सख्ती की जरूरत है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या इस मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई ही यह तय करेगी कि सरकार की धान खरीदी नीति और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के दावे कितने प्रभावी हैं।
फिलहाल यह वायरल वीडियो न सिर्फ धान माफियाओं की बेखौफ गतिविधियों को उजागर करता है, बल्कि कानून व्यवस्था और सरकारी तंत्र की सख्ती पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।



