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धान खरीदी के नाम पर लूट: त्रिकुंडा केंद्र में आदिवासी किसान से 5000 की वसूली, वीडियो वायरल

त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र बना अवैध वसूली का अड्डा, खरीदी प्रभारी पर गंभीर आरोप, वीडियो वायरल

रामानुजगंज: बलरामपुर जिले के त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र से किसानों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है. जहां एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार किसानों से एक-एक दाना धान खरीदने और खरीदी प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर खरीदी केंद्रों को अवैध वसूली का अड्डा बनाया जा रहा है.

त्रिकुंडा धान खरीदी केंद्र के खरीदी प्रभारी दीपक यादव पर एक गरीब आदिवासी किसान से 5000 रुपये की अवैध वसूली करने का आरोप लगा है. आरोप है कि किसान द्वारा लाए गए धान को अमानक बताकर 20 बोरी धान काटने की धमकी दी गई और कहा गया कि या तो 20 बोरी धान अतिरिक्त दो या फिर 5000 रुपये नगद दो, तभी धान की खरीदी होगी. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

वीडियो देखें :

गरीब आदिवासी किसान से जबरन वसूली

पीड़ित किसान राधानगर क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है, जो आदिवासी वर्ग से आता है और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है. किसान का आरोप है कि जब वह अपना धान लेकर त्रिकुंडा खरीदी केंद्र पहुंचा तो तौल के बाद खरीदी प्रभारी ने उसके धान को अमानक बताते हुए सीधे 20 बोरी धान काटने की बात कही. किसान द्वारा विरोध करने पर उसे खरीदी से वंचित करने की धमकी दी गई.

डरे-सहमे किसान ने पास-पड़ोस से उधार लेकर 5000 रुपये की व्यवस्था की और खरीदी प्रभारी को दिए, तब जाकर उसका धान खरीदा गया. किसान का कहना है कि मजबूरी में उसे यह राशि देनी पड़ी, क्योंकि उसके पास कोई और विकल्प नहीं था.

वायरल वीडियो में लेन-देन साफ दिखाई दे रहा

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो 10 दिसंबर का बताया जा रहा है. वीडियो में साफ देखा और सुना जा सकता है कि एक आदिवासी किसान अपना धान तौलवाने के बाद तौल पत्रक और ऑनलाइन एंट्री के लिए खरीदी प्रभारी दीपक यादव के पास पहुंचता है.

वीडियो में खरीदी प्रभारी किसान से धीमी आवाज में पूछते हैं कि “जमा कर दिए आप?” किसान के हां कहने पर खरीदी प्रभारी अपने कथित वसूली एजेंट से पूछते हैं कि “5000 जमा हो गया इनका?” एजेंट द्वारा “हां, प्राप्त हो गया” कहने के बाद खरीदी प्रभारी धान को ऑनलाइन मॉड्यूल में चढ़ाने का आदेश देते हैं.

इतना ही नहीं, वीडियो में खरीदी प्रभारी यह कहते हुए भी सुनाई देते हैं कि अगर समय पर पैसा नहीं मिलता तो सभी सस्पेंड हो जाते. इसके बाद खरीदी प्रभारी और वसूली एजेंट कार्यालय कक्ष में जाकर पैसों का आपस में बंटवारा करते हुए नजर आते हैं.

तौल पत्रक के नाम पर 250 रुपये की अलग वसूली

मामला यहीं खत्म नहीं होता. किसान का आरोप है कि जब वह 5000 रुपये देने के बाद तौल पत्रक लेने पहुंचा तो वहां मौजूद एक कर्मचारी ने तौल पत्रक काटने के लिए 250 रुपये की अतिरिक्त मांग की. किसान ने बताया कि उसके पास और पैसे नहीं थे, क्योंकि वह पहले ही उधार लेकर राशि दे चुका था.

आरोप है कि कर्मचारी ने तौल पत्रक में गड़बड़ी कर देने की धमकी दी और कहा कि अगर पैसे नहीं दिए तो उसे बार-बार दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ेंगे. मजबूर किसान ने किसी तरह बाद में पैसे देने का आश्वासन देकर तौल पत्रक हासिल किया.

कदम-कदम पर किसानों से अवैध वसूली

स्थानीय किसानों का कहना है कि त्रिकुंडा खरीदी केंद्र में धान बेचने के दौरान हर स्तर पर अवैध वसूली की जा रही है. खरीदी प्रभारी, कंप्यूटर ऑपरेटर और तौल पत्रक काटने वाले कर्मचारी सभी अलग-अलग रकम की मांग करते हैं. इससे किसानों को उनकी फसल का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता और उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है.

विशेषकर गरीब और आदिवासी किसान इस व्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित हैं, जो मजबूरी में पैसे देने को विवश हैं.

प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने प्रशासनिक सक्रियता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. जब कलेक्टर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी लगातार धान खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं, तब इस तरह की खुली अवैध वसूली कैसे हो रही है, यह समझ से परे है.

अब सवाल यह है कि वायरल वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई करता है।

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