कोरियागरियाबंदछत्तीसगढ़जसपुरजांजगीर चांपाझारखण्डदिल्लीप्रतापपुरबलरामपुरबलौदा बाजारबस्तरबिलासपुरभरतपुर सोनहतभारतमहासमुंदमहेंद्रगढ़मुंबईरघुनाथनगरराजपुरराज्यसभारामचंद्रपुररामानुजगंजरायगढ़रायपुररायपुरवीजापुरसरगुजासुरजपुर

बलरामपुर में वन भूमि अतिक्रमण हटाने पर बवाल,वन विभाग की टीम से मारपीट, DFO ने कार्रवाई के दिए निर्देश

पंडरी वन भूमि अतिक्रमण विवाद अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम पर हमला,
मारपीट व अभद्रता करने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी का बयान
बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पंडरी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। वन विभाग की टीम और ग्रामीणों के बीच हुए इस विवाद ने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के दौरान ग्रामीणों ने रेंजर समेत वन विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ झड़प, मारपीट और अभद्रता की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर बुलाना पड़ा।


यह मामला पंडरी गांव के केनवारी क्षेत्र का है, जहां ग्रामीणों द्वारा वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। बताया जा रहा है कि रातोंरात बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वन भूमि पर दुकानें और अस्थायी निर्माण कर दिए थे। इसकी जानकारी मिलने पर वन विभाग का अमला अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंचा था।


कार्रवाई शुरू होते ही ग्रामीणों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच कहासुनी, धक्का-मुक्की और मारपीट होने लगी। इस दौरान रेंजर शिवनाथ ठाकुर सहित कई वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी चोटिल होने की बात सामने आ रही है। हंगामे के कारण इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनी हुई है और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।


इस पूरे मामले में ग्रामीणों ने रघुनाथनगर वन परिक्षेत्र के रेंजर शिवनाथ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर ने पहले उनसे पैसे लेकर वन भूमि पर कब्जा करवाया और अब उसी कब्जे को हटाने पहुंचे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जितना पैसा दिया गया, उतनी जमीन पर कब्जा करवाया जाता था। इसी वजह से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वन भूमि पर दुकानें लगाकर कब्जा किया था। ग्रामीणों ने मौके पर रेंजर से पैसे वापस करने की मांग भी की।

वहीं इस मामले में वन मंडलाधिकारी आलोक बाजपेयी ने khabar30.in को जानकारी देते हुए कहा कि वन विभाग की टीम शासकीय कार्य में लगी हुई थी। कार्रवाई के दौरान जिन लोगों ने रेंजर और वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ झड़प, मारपीट और अभद्रता की है, उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।वन मंडलाधिकारी ने यह भी बताया कि पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और संबंधित थाने में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया की जाएगी। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाएगा।


इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और रेंजर पर लगे आरोपों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर पर होती है और क्या इस मामले में किसी प्रकार की विभागीय जांच भी कराई जाती है।


फिलहाल प्रशासन और वन विभाग की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद ही इस पूरे प्रकरण की तस्वीर साफ हो पाएगी।

Related Articles

Back to top button