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अफ़ीम की खेती पर पर्दा? गिरदावरी में ‘अन्य अनाज’ लिखे जाने से उठे सवाल


अफ़ीम की खेती पर पर्दा? गिरदावरी में ‘अन्य अनाज’ लिखे जाने से उठे सवाल

बलरामपुर।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अफ़ीम की खेती पकड़े जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। जिस भू-खंड पर प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान अफ़ीम की खेती मिलने की बात सामने आई थी, उसी जमीन की गिरदावरी रिपोर्ट में फसल को ‘अन्य अनाज’ बताया गया है। इस विरोधाभास ने प्रशासन और राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दरअसल, हाल ही में बलरामपुर के एक भू-खंड पर अफ़ीम की अवैध खेती का मामला सामने आया था। स्थानीय स्तर पर हुई कार्रवाई में बताया गया कि यह खेती एक भाजपा नेता की निगरानी में की जा रही थी। इसके बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया और विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।



लेकिन अब सामने आई गिरदावरी रिपोर्ट ने विवाद को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिस खेत में अफ़ीम की खेती पकड़ी गई थी, वहां की फसल को ‘अन्य अनाज’ के रूप में दर्ज किया गया है। यानी आधिकारिक दस्तावेज में अफ़ीम का कहीं उल्लेख ही नहीं है।

यही वजह है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अफ़ीम को ‘अन्य अनाज’ बताने का श्रेय कौन लेगा। क्या यह महज कागजी गलती है या फिर किसी को बचाने की कोशिश?

विपक्षी दलों का कहना है कि अगर मौके पर अफ़ीम की खेती मिली थी, तो गिरदावरी में उसे स्पष्ट रूप से दर्ज क्यों नहीं किया गया। उनका आरोप है कि मामले को हल्का दिखाने के लिए कागजों में फसल की श्रेणी बदल दी गई।

दूसरी ओर प्रशासन की तरफ से अभी तक इस विरोधाभास पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अधिकारी सिर्फ इतना कह रहे हैं कि मामले की जांच की जा रही है और रिपोर्ट की भी समीक्षा की जाएगी।

गौरतलब है कि बलरामपुर और आसपास के इलाकों में पहले भी अफ़ीम की अवैध खेती के मामले सामने आते रहे हैं। कई बार कार्रवाई भी हुई, लेकिन हर बार सवाल यही उठता है कि इतनी बड़ी खेती प्रशासन की नजर से कैसे बच जाती है।

अब इस ताज़ा मामले में गिरदावरी रिपोर्ट के सामने आने के बाद बहस और तेज हो गई है। अगर खेत में वास्तव में अफ़ीम की खेती थी, तो सरकारी दस्तावेजों में उसे ‘अन्य अनाज’ कैसे लिखा गया।

यानी सवाल सिर्फ अवैध खेती का नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता का भी है। अब सबकी नजर इस पर है कि जांच के बाद जिम्मेदारी किस पर तय होती है और क्या सच में अफ़ीम को ‘अन्य अनाज’ बनाने वालों तक कार्रवाई पहुंचेगी।

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