अवैध अफीम खेती के मामलों के बाद प्रशासन सख्त, बलरामपुर जिले में 58 पटवारियों का बड़ा तबादला

अवैध अफीम खेती के मामलों के बाद प्रशासन सख्त, बलरामपुर जिले में 58 पटवारियों का बड़ा तबादला
बलरामपुर। जिले में हाल ही में सामने आए अवैध अफीम की खेती के मामलों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा ने एक साथ 58 पटवारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। इस फैसले से जिले की कई तहसीलों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ पटवारियों को हटाकर अन्य स्थानों पर भेजा गया है। प्रशासन के इस कदम को राजस्व व्यवस्था को दुरुस्त करने और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
जारी आदेश के अनुसार राजपुर, रामानुजगंज, कुसमी, वाड्रफनगर, शंकरगढ़, रघुनाथनगर और बलरामपुर सहित कई तहसीलों में पदस्थ पटवारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है। बताया जा रहा है कि कई पटवारी लंबे समय से एक ही हल्के में कार्यरत थे, जिसके कारण राजस्व कार्यों में ढिलाई और शिकायतों की स्थिति बन रही थी। ऐसे में प्रशासन ने व्यापक स्तर पर तबादला कर व्यवस्था में कसावट लाने का निर्णय लिया।

सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध रूप से अफीम की खेती के मामले सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर सवाल उठने लगे थे। राजस्व विभाग की जिम्मेदारी जमीन से जुड़े मामलों की निगरानी करना होती है, ऐसे में इन घटनाओं के बाद प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। इसी के तहत राजस्व तंत्र में सख्ती दिखाते हुए बड़े स्तर पर तबादले की कार्रवाई की गई है।

प्रशासन का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से कर्मचारियों के स्थानीय स्तर पर अनावश्यक प्रभाव और संबंध बन जाते हैं, जिससे कई बार कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। ऐसे में समय-समय पर स्थानांतरण प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित पटवारियों को 13 मार्च 2026 से तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किया जाएगा। साथ ही सभी कर्मचारियों को 16 मार्च 2026 तक अपने नए पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करना होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं ताकि कार्यमुक्ति और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
जिला प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर नई जगह पर जॉइन नहीं करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने और लापरवाही पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने और प्रशासनिक तंत्र को अधिक जवाबदेह बनाने के लिए ऐसे कदम जरूरी होते हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में जिला प्रशासन राजस्व विभाग में और भी सख्ती बरत सकता है तथा कार्यप्रणाली की नियमित समीक्षा भी की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।



