
बलरामपुर नगर पालिका चुनाव: भाजपा में प्रत्याशी चयन को लेकर मचा घमासान
जैसे-जैसे नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, बलरामपुर जिले में राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश संगठन द्वारा जारी की गई पार्षदों की सूची में वार्ड क्रमांक 12 से अमित गुप्ता (मंटू गुप्ता) को प्रत्याशी बनाया गया था। लेकिन जब यह सूची जिला संगठन तक पहुंची, तो उसमें अचानक बदलाव कर दिया गया। जिला अध्यक्ष ने अमित गुप्ता का नाम काटकर दूसरे प्रत्याशी बिहारी पाल का नाम जोड़ दिया, जिससे विवाद गहराता जा रहा है।

अमित गुप्ता का आरोप: प्रदेश निर्णय की अवहेलना
अमित गुप्ता ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए जिला अध्यक्ष पर मनमानी और प्रदेश नेतृत्व की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा:
"प्रदेश स्तर पर जारी सूची में मेरा नाम शामिल था, लेकिन जिला अध्यक्ष ने अपने निजी स्वार्थ के चलते मेरा नाम काटकर बिहारी पाल का नाम जोड़ दिया। यह प्रदेश नेतृत्व के निर्णय का अपमान है।"
सोशल मीडिया पर नाराजगी और बगावत के संकेत


अमित गुप्ता ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की है। उनके पोस्ट से यह संकेत मिलते हैं कि वह पार्टी से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ सकते हैं। इस स्थिति ने पार्टी के भीतर खेमेबाजी को और हवा दी है।
दो गुटों में बंटी भाजपा
भाजपा अब दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक गुट बिहारी पाल का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा गुट अमित गुप्ता के पक्ष में खड़ा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि अमित गुप्ता ने पार्टी के लिए लगातार मेहनत की है और वे स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हैं। वहीं, बिहारी पाल पर आरोप है कि वे पिछले चुनावों में निष्क्रिय रहे हैं और पार्टी के लिए कोई विशेष योगदान नहीं दिया।
अमित गुप्ता का पार्टी के लिए योगदान
अमित गुप्ता को बलरामपुर क्षेत्र में भाजपा का प्रमुख चेहरा माना जाता है। वे विधायक राम विचार नेताम के करीबी माने जाते हैं और उन्होंने विधानसभा चुनावों में पार्टी को मजबूत करने के लिए तन-मन-धन से योगदान दिया। विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने भाजपा के पक्ष में मुखर होकर काम किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वार्ड स्तर पर भी सबसे अधिक समर्थन अमित गुप्ता को मिला था।
बिहारी पाल पर लगाए गए आरोप
अमित गुप्ता और उनके समर्थकों का कहना है कि बिहारी पाल ने पूर्व के चुनावों में पार्टी के लिए कुछ नहीं किया। यह भी कहा जा रहा है कि बिहारी पाल ने पहले कहा था कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और एल्डरमेन पद को स्वीकार करेंगे। लेकिन कुछ लोगों के दबाव में आकर उन्होंने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई और जिला अध्यक्ष ने उन्हें प्रत्याशी बना दिया।
भाजपा को नुकसान की आशंका
इस विवाद से भाजपा को आगामी नगर पालिका चुनाव में नुकसान होने की संभावना है। अगर अमित गुप्ता निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं, तो पार्टी के वोट बैंक में बड़ा विभाजन हो सकता है। इससे विपक्ष को फायदा मिल सकता है।
संगठन की भूमिका पर सवाल
प्रदेश संगठन ने अब तक इस विवाद पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, कार्यकर्ता और समर्थक प्रदेश नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि संगठन ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
आगे की रणनीति
यह देखना दिलचस्प होगा कि अमित गुप्ता आगे क्या कदम उठाते हैं। पार्टी से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ना उनके लिए एक बड़ा फैसला होगा। उन्होंने कहा:

"अगर मेरे साथ न्याय नहीं हुआ, तो मैं निर्दलीय चुनाव लड़ने पर विचार करूंगा। मेरा समर्थन मेरे क्षेत्र के लोगों के साथ है।"
बलरामपुर नगर पालिका चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर भाजपा के भीतर जारी विवाद ने पार्टी के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। यह विवाद संगठन की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर रहा है। अमित गुप्ता का बगावत करना पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अब सबकी निगाहें संगठन के अगले कदम और अमित गुप्ता की रणनीति पर टिकी हैं।
पार्टी को जल्द से जल्द इस विवाद को सुलझाकर एकजुटता दिखानी होगी, अन्यथा यह मामला पार्टी की साख और चुनावी प्रदर्शन को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।



