
पार्थ तिवारी की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे रामानुजगंज नगर और जिले के लिए गौरव का विषय है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है, जिसमें चयन प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है। पार्थ ने इस चुनौतीपूर्ण परीक्षा में सफलता प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि मेहनत, समर्पण और अनुशासन के साथ बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
पार्थ का परिवार और शिक्षा:
पार्थ तिवारी बचपन से ही मेधावी रहे हैं। उनके नाना, नगर के प्रतिष्ठित पुरोहित नंदू पंडित जी हैं, जो समाज में अपनी प्रतिष्ठा और संस्कारों के लिए जाने जाते हैं। उनकी माता दीपा तिवारी स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं और पिता रामानुजगंज हाई स्कूल में व्याख्याता हैं। परिवार से मिले संस्कार और समर्थन ने पार्थ को प्रेरित किया कि वह अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहें। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल अंबिकापुर में हुई, जहां उन्हें उचित मार्गदर्शन और अनुशासन के साथ पढ़ाई करने का अवसर मिला। सैनिक स्कूल में दी जाने वाली कड़ी ट्रेनिंग और शारीरिक-मानसिक अनुशासन ने उनकी इस सफलता की नींव रखी।

एनडीए परीक्षा और चयन प्रक्रिया:
एनडीए परीक्षा का आयोजन यूपीएससी द्वारा किया जाता है और यह प्रक्रिया अत्यंत कठिन मानी जाती है। इस परीक्षा में लिखित परीक्षा, एसएसबी इंटरव्यू (सेवा चयन बोर्ड) और मेडिकल टेस्ट जैसे कई स्तर शामिल होते हैं। पार्थ ने अपनी मेहनत और लगन से इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार किया। यह उनके कौशल, आत्मविश्वास और तैयारी का प्रमाण है।
प्रशिक्षण और भविष्य:
चयन के बाद पार्थ को पुणे, महाराष्ट्र के खड़गवासला स्थित एनडीए प्रशिक्षण केंद्र में भेजा जाएगा, जहां वह 4 वर्षों की कठिन सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इस प्रशिक्षण में शारीरिक, मानसिक और रणनीतिक कौशलों का विकास किया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त किया जाएगा। यह पद न केवल जिम्मेदारी और सम्मान का प्रतीक है, बल्कि देश सेवा का अवसर भी प्रदान करता है।
प्रेरणा का स्रोत:
आज के समय में, जब अधिकांश युवा निजी क्षेत्रों में उज्ज्वल भविष्य की तलाश में लगे हुए हैं, पार्थ तिवारी का सेना में जाने का निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उनका देश के प्रति यह समर्पण और जुनून अन्य युवाओं को भी प्रेरित करेगा कि वे देश सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाएं।

जिले का पहला युवा:
पार्थ तिवारी एनडीए में चयनित होने वाले रामानुजगंज जिले के पहले युवा हैं। उनकी इस उपलब्धि ने जिले का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। यह सफलता यह भी दर्शाती है कि छोटे शहरों और गांवों से भी बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं, बशर्ते कि सही दिशा में मेहनत और समर्पण किया जाए।
पार्थ तिवारी की सफलता उनकी मेहनत, परिवार के सहयोग और सैनिक स्कूल की सुदृढ़ शिक्षा प्रणाली का परिणाम है। उनकी यह उपलब्धि देश के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा है कि अगर आपमें जुनून और धैर्य है, तो आप किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं। पार्थ को उनकी इस सफलता के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। उनके उज्ज्वल भविष्य और देश सेवा के प्रति समर्पण के लिए पूरा समाज गर्व महसूस करता है।

