खदानों की ब्लास्टिंग से रामगढ़ में दरारें“रामगढ़ सरगुजा की आस्था और विरासत”

पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव की पहल पर गठित हुई रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति,कोल परियोजना पर उठाए सवाल, कहा– “रामगढ़ हमारी आस्था और विरासत”
अंबिकापुर।
सरगुजा की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ पर्वत को बचाने की मुहिम अब संगठित रूप ले चुकी है। पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने रविवार को प्रेस वार्ता कर बताया कि उनकी पहल पर रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति का गठन किया गया है। यह समिति पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और केवल धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय धरोहर के संरक्षण पर केंद्रित होकर काम करेगी।

सिंहदेव ने कहा कि हाल ही में वन विभाग द्वारा केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के संबंध में जारी सर्वे रिपोर्ट तथ्यों से परे है। रिपोर्ट में पर्वत को 10 किलोमीटर से दूर बताया गया है, जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के दौरान यही पर्वत खदान की सीमा से 10 किलोमीटर दायरे में माना गया था। इसी वजह से उस समय खदान को मंजूरी नहीं मिल पाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में रिपोर्ट को बदला गया है ताकि खदान को स्वीकृति देने की राह आसान हो सके।

उन्होंने सोशल मीडिया पर भी दस्तावेजों के साथ इस रिपोर्ट को चुनौती दी है और इसे गुमराह करने वाला बताया है। सिंहदेव ने कहा कि रामगढ़ सिर्फ एक पर्वत नहीं है, बल्कि आस्था और इतिहास से जुड़ी अमूल्य धरोहर है।
खदानों की ब्लास्टिंग से दरारें
सिंहदेव ने बताया कि क्षेत्र में चल रही अन्य खदानों की ब्लास्टिंग से रामगढ़ पर्वत में पहले ही दरारें आ चुकी हैं। यदि नजदीकी खदानों को और स्वीकृति मिली तो इसका अस्तित्व गंभीर संकट में पड़ सकता है। “रामगढ़ हमारी आस्था और विरासत है, इसे बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है,” उन्होंने बैठक में कहा।

समिति का उद्देश्य
नवगठित रामगढ़ संरक्षण एवं संवर्धन समिति का उद्देश्य स्थानीय लोगों को जोड़ना और सांस्कृतिक व धार्मिक धरोहर की रक्षा करना है। समिति किसी राजनीतिक दल से जुड़ी नहीं होगी। इसका मुख्य फोकस जनजागरूकता, वैज्ञानिक अध्ययन और प्रशासनिक स्तर पर दबाव बनाकर रामगढ़ को कोल परियोजना से बचाना होगा।
स्थानीय समर्थन
उदयपुर के रामगढ़ शेड में आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सिंहदेव के इस कदम का समर्थन किया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी कहा कि रामगढ़ पर्वत उनकी आस्था का केंद्र है और इससे छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पृष्ठभूमि
रामगढ़ पर्वत छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां प्राचीन गुफाएं, शिल्प और धार्मिक स्थल हैं। माना जाता है कि यह क्षेत्र रामायण काल से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय धरोहर के रूप में देखा जाता है।
सिंहदेव ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक स्वार्थ की नहीं, बल्कि आस्था और धरोहर की रक्षा की है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग दें।


