“गौधाम योजना” पर कांग्रेस का तीखा हमला, कहा— गोठान योजना को नया नाम देकर राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश

“गौधाम योजना” पर कांग्रेस का तीखा हमला, कहा— गोठान योजना को नया नाम देकर राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश
बलरामपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बड़े प्रचार के साथ शुरू की जा रही तथाकथित “गौधाम योजना” को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने इस योजना को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि यह कोई नई पहल नहीं बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की गोठान योजना को ही नया नाम और नया बोर्ड लगाकर पेश किया जा रहा है।
दरअसल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्री राम विचार नेताम और गौ सेवा आयोग के प्रदेश अध्यक्ष विशेश्वर पटेल की मौजूदगी में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, कोनी बिलासपुर से इस योजना का वर्चुअल शुभारंभ किया जा रहा है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले के ग्राम देवीगंज, विकासखंड रामचंद्रपुर में “सुरभि गौधाम” का वर्चुअल उद्घाटन भी विभिन्न जनप्रतिनिधियों और अतिथियों की मौजूदगी में किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष हीरामुनि निकुंज, गौ सेवा आयोग के जिला अध्यक्ष आशीष केसरी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, भाजपा जिला महामंत्री भानु दीक्षित सहित कई पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
इस पूरे आयोजन के बीच कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक पुनःपैकेजिंग करार दिया है।
जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता सुनील सिंह ने कहा कि राज्य सरकार जिस योजना को “नई और महत्वाकांक्षी पहल” बताकर प्रचारित कर रही है, दरअसल उसका ढांचा और अवधारणा वही है जो कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई गोठान योजना में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस योजना को भाजपा नेताओं ने पहले लगातार निशाना बनाया, उसी को अब नया नाम देकर जनता के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है।
सुनील सिंह ने कहा कि अगर गोठान योजना वास्तव में खराब थी तो आज उसी मॉडल को अपनाकर गौधाम योजना के रूप में क्यों शुरू किया जा रहा है। और अगर वह योजना अच्छी थी तो फिर उसे वर्षों तक बदनाम करने और राजनीतिक मुद्दा बनाने की क्या जरूरत थी।

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय गोठानों में पशुओं के लिए चारा, देखभाल और ग्रामीण आर्थिक गतिविधियाँ संचालित होती थीं, जिससे गौवंश की सुरक्षा के साथ-साथ ग्रामीणों को भी रोजगार और आय के अवसर मिलते थे। लेकिन वर्तमान समय में कई स्थानों पर इन व्यवस्थाओं की स्थिति कमजोर पड़ गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज कई गोठानों में गतिविधियाँ ठप पड़ी हैं और कई जगहों पर केवल नाममात्र की व्यवस्था रह गई है। कुछ स्थानों पर शेड खाली पड़े हैं और कार्यक्रम केवल उद्घाटन, बोर्ड लगाने और फोटो खिंचवाने तक सीमित दिखाई दे रहे हैं।
सुनील सिंह ने कहा कि प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी आवारा पशुओं की समस्या गंभीर बनी हुई है। सड़कों और खेतों में भटक रहे पशुओं के कारण किसान परेशान हैं और अपनी फसलों को बचाने के लिए रात-रात भर खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद सरकार ठोस समाधान देने के बजाय वर्चुअल उद्घाटन और मंचीय कार्यक्रमों के जरिए प्रचार करने में ज्यादा रुचि दिखा रही है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति में जमीन पर व्यवस्थाएँ कमजोर दिखाई दे रही हैं, जबकि मंचों पर तालियों की गूंज ज्यादा सुनाई दे रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या केवल योजनाओं का नाम बदलने, नए बोर्ड लगाने और बड़े-बड़े दावे करने से गौसेवा हो जाएगी, या फिर वास्तव में ऐसी ठोस व्यवस्था बनाई जाएगी जिससे गौवंश सुरक्षित रहे, किसानों को राहत मिले और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में गौसेवा को लेकर गंभीर है तो उसे योजनाओं के नाम बदलने की बजाय उनकी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने, संसाधन बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार कांग्रेस शासनकाल की योजनाओं को ही नया नाम और नया चेहरा देकर पेश कर रही है और उन्हें अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ समझ रही है और केवल प्रचार से सच्चाई नहीं बदली जा सकती।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गौसेवा के नाम पर राजनीति करने के बजाय सरकार को जमीनी स्तर पर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे गौवंश की वास्तविक सुरक्षा हो, किसानों को राहत मिले और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

